मंगलवार को जिला परिषद कार्यालय परिसर आम के कारण खास हो गया. यहां जिला प्रशासन की ओर से आम्रलिका महोत्सव का आयोजन किया गया. नौ स्टॉल में आम्रपाली, मल्लिका, लंगड़ा, गुलाबखश, जरदालू समेत एक दर्जन से अधिक किस्म के आम थे. विभिन्न प्रखंडों के आम उत्पादकों ने विभिन्न किस्मों के 60 क्विंटल आम की प्रदर्शनी लगायी व बिक्री की. खबर लिखे जाने तक 52 क्विंटल आम की बिक्री हो चुकी थी.
मौके पर डीसी अजय नाथ झा ने कहा कि यह महोत्सव स्वाद, सुगंध व संस्कृति का संगम है. किसी भी कार्यक्रम की सफलता केवल उत्पादों की बिक्री से नहीं आंकी जाती है. इसमें भाग लेने वाले किसानों व आयोजन से जुड़े लोगों के चेहरे पर दिखने वाली खुशी व संतोष ही वास्तविक सफलता का पैमाना है. कोविड-19 के बाद राज्य सरकार व मुख्यमंत्री की प्रेरणा से बिरसा हरित ग्राम योजना को अभियान के रूप में आगे बढ़ाया गया. जिला में 4,500 एकड़ से अधिक क्षेत्र में बागवानी विकसित की गयी है. 5,500 किसान इससे जुड़े हैं. शुरुआत में लोगों की रुचि कम थी, लेकिन आज किसान एक-दूसरे को देख कर इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं.झारखंड के आम को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की जरूरत
डीसी ने कहा कि भारत विश्व के कुल आम उत्पादन का लगभग 40 प्रतिशत उत्पादन करता है. झारखंड के आम की ब्रांडिंग की जाये, तो नयी पहचान मिल सकती है. आने वाले वर्षों में बोकारो के आम की मांग पूरे देश में हो और यहां के किसान सीधे बड़े बाजारों से जुड़ें, इसका लक्ष्य रखा गया है. डीसी ने युवाओं से कृषि व बागवानी आधारित उद्योगों में संभावनाएं तलाशने की अपील की. कहा कि आम आधारित प्रसंस्करण इकाई, मूल्य संवर्धन व एग्रो-बेस्ड उद्योगों के माध्यम से बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित किये जा सकते हैं. उन्होंने डीएमएफटी व अन्य योजना से आम उत्पाद पर आधारित महिला समूहों व किसान उत्पादक संगठनों को प्रोत्साहित करने का सुझाव दिया.बोकारो की नयी पहचान बने कृषि व बागवानी
डीसी ने कहा कि बोकारो केवल इस्पात, उद्योग व खनिज के लिए ही नहीं, बल्कि कृषि, बागवानी व स्थानीय उत्पादों के लिए भी जाना जाये. उन्होंने जिला वासियों से स्थानीय किसानों की ओर से उत्पादित आम खरीदने व बोकारो के आम को राज्य व देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाने का आह्वान किया.कार्यक्रम को अपर समाहर्ता सुनील चंद्र, एआरएम विनीत कुमार, चास एसडीओ प्रांजल ढ़ांडा, एएसपी वेदांत शंकर ने भी संबोधित किया. मौके पर डीपीएलआर पूर्णिमा कुमारी, जिला पंचायती राज पदाधिकारी सफीक आलम, डीएसडब्ल्यूओ डॉ सुमन गुप्ता, डीपीआरओ रवि कुमार, डीपीएम अनील डुंगडुंग, एडीएसएस सुचिता किरण, डीईओ जगरनाथ लोहरा, एपीआरओ अविनाश कुमार सिंह, नोडल पदाधिकारी पंकज दुबे, सीएसआर नोडल शक्ति कुमार समेत सभी बीडीओ व सीओ मौजूद थे.
हर पंचायत में ऐसा आयोजन होना चाहिए : जिप अध्यक्ष
जिप अध्यक्ष सुनीता देवी ने कहा कि आम की बागवानी किसानों के लिए आय का अच्छा स्रोत बन रही है. पंचायत स्तर पर ऐसा आयोजन होना चाहिए.
जिला में अब तक 50 टन से अधिक आम का उत्पादन : डीडीसी
डीडीसी शताब्दी मजूमदार ने कहा कि आयोजन का उद्देश्य किसानों को एक मंच प्रदान करना था. बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत भूमिहीन, अनुसूचित जनजाति, पिछड़े वर्ग व अन्य जरूरतमंद किसानों को फलदार पौधे उपलब्ध कराये जाते हैं. पौधों के रखरखाव, सिंचाई, तकनीकी मार्गदर्शन व अन्य आवश्यक सहायता भी दी जाती है. डीडीसी ने बताया कि वर्ष 2017 से अब तक जिला में 4,500 एकड़ बंजर भूमि को हरित क्षेत्र में परिवर्तित किया गया है. योजना के तहत किसानों को फल उत्पादन के साथ-साथ अंतरवर्ती खेती (इंटरक्रॉपिंग) का भी लाभ मिल रहा है. इस वर्ष अब तक 50 टन से अधिक आम का उत्पादन दर्ज किया गया है.
