बच्चों को अल्पआयु से ही सकारात्मक सोच का भाव दें अभिभावक

बोकारो क्लब में हुआ आयोजन बोकारो : कारगिल युद्ध के महानायक परमवीर चक्र विजेता सूबेदार मेजर योंगेंद्र सिंह यादव ने शनिवार को सेक्टर पांच स्थित बोकारो क्लब में अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद् (बोकारो) के कार्यक्रम में लोगों को प्रेरित किया. कहा : सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है. सकारात्मकता से […]

बोकारो क्लब में हुआ आयोजन

बोकारो : कारगिल युद्ध के महानायक परमवीर चक्र विजेता सूबेदार मेजर योंगेंद्र सिंह यादव ने शनिवार को सेक्टर पांच स्थित बोकारो क्लब में अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद् (बोकारो) के कार्यक्रम में लोगों को प्रेरित किया. कहा : सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है. सकारात्मकता से हर काम आसान हो जाता है. अभिभावक बच्चों को अल्पआयु से ही सकारात्मक सोच का भाव दें. पहले बच्चे को सफल इंसान बनाने की कोशिश करें. अगर बच्चा सफल इंसान बन जाये, तो फिर इंजीनियर-डॉक्टर समेत सबकुछ बन जायेगा. मेजर योगेंद्र ने कहा : इंसान की पहचान कार्य से होती है. कार्य ऐसा होना चाहिए, जिससे देश का भला हो.
कौन मार सकता था, जिसे मरने का डर नहीं : मेजर योगेंद्र ने कारगिल युद्ध की दास्तान भी साझा की. कहा : एक सैनिक ही साथी के लिए जान दे सकता है. कम उम्र में सेना में योगदान करने के बाद जीवन देश के नाम कर दिया. कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना की हिम्मत ही थी कि पाकिस्तानी गोली कुछ नहीं बिगाड़ सकी. कहा : कारगिल युद्ध के दौरान कौन मार सकता था, तो डरता नहीं है मरने से. मेजर योगेंद्र ने कहा : किसान व सेना का कोई मोल नहीं होता. सेना के रक्त-समय व किसान के पसीने की कोई कीमत नहीं होती है.
गीत व चित्रकारी से दिया राष्ट्रप्रेम का संदेश : परमवीर चक्र विजेता सुबेदार मेजर योंगेंद्र सिंह यादव के सम्मान में कवि-गीतकार सह चित्रकार बाबा सत्यनारायण मौर्य की ओर से देशभक्ति पूर्ण कार्यक्रम हुआ. बाबा मौर्य ने गीत व चित्रकारी से देशभक्ति, राष्ट्रवाद व राष्ट्रप्रेम के संदेश को पहुंचाया. कहा : कमी को दूर करने के लिए दूसरे के भरोसे रहने की प्रवृत्ति त्यागनी होगी. कुछ जिम्मेदारी अपने कंधे पर भी लेनी होगी. कहा : देश की अंगड़ाई को समझना होगा. देश एक है, इसे एक बनाये रखने में हर किसी का योगदान जरूरी है.
बाबा मौर्य ने स्वामी विवेकानंद, महात्मा गांधी समेत देश के नायकों की तस्वीर गीत गाते हुए उकेरी. महज कुछ सेकेंड में चित्र उकेरने की कला से हर कोई हतप्रभ दिखा. बाबा मौर्य ने कहा : दिल में जैसी चाहत होती है, हाथ उसी तरह से काम करता है. मन को साफ रखने की जरूरत है. मन साफ रहा, तो समाज साफ होगा, समाज साफ रहा, तो देश स्वच्छ बनेगा. बाबा मौर्य ने कहा : स्वच्छता का मतलब सिर्फ साफ-सफाई नहीं, बल्कि समस्या की सफाई है.
अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद (बोकारो) का कार्यक्रम : देशभक्ति, राष्ट्रवाद व राष्ट्रप्रेम के संदेश से ओतप्रोत हुआ बोकारो
कौन हैं सूबेदार मेजर योगेंद्र सिंह यादव
कारगिल युद्ध के इस महानायक का जन्म 10 मई 1980 को बुलंदशहर के औरंगाबाद अहीर गांव में हुआ था़ इनके पिता करण सिंह भी कुमायूं रेजिमेंट के एक सैनिक थे, जिन्होंने 1965 व 1971 का युद्ध लड़ा था. इनके भाई भी फौज में थे़ पिता व भाई से युद्ध की कई कहानियां सुनी थीं, उसी समय से फौज में जाकर अपने देश की सेवा करने के लिए उनका मन मचलने लगा था़ 16 वर्ष पांच महीने की अल्प आयु में वह सेना के 18 ग्रेडीनियर में भरती हुए़ सेना में रहने के कुछ वर्षों की उनकी कई रोचक गाथाएं हैं. एकबार उन्होंने शत्रुओं से ऐसी लड़ाई लड़ी थी कि बुरी तरह घायल हो गये थे. उन्हें पाकिस्तानी सेना ही नहीं अपनी सेना भी मृत मान चुकी थी़ मरणोपरांत उन्हें परमवीर चक्र देने की घोषणा की गयी थी, लेकिन वे अस्पताल में जी उठे, यह ईश्वर का एक करिश्मा था़
कभी आंखें नम हुईं तो कभी कदम थिरके…
कार्यक्रम की भव्यता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एक पल के लिए भी दर्शकों की न तो नजर भटकी और न ही उनके दिमाग में देशभक्ति के अलावा कोई दूसरा ख्याल आया. मेजर के अनुभव साझा करने के दौरान काफी लोगों की कभी सांसें थम गयीं तो कई की आंखें नम हो गयीं. वहीं बाबा मौर्य के प्रस्तुतीकरण के दौरान कदम थिरके, शरीर झूमा. दृश्य ऐसा मानो बोकारो राष्ट्रवाद के संदेश की बारिश में नहा रहा हो.

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