बांग्ला सावन की पहली सोमवारी आज, सैकड़ों श्रद्धालु गये चिड़का

चास : बांग्ला सावन की पहली सोमवारी को जलार्पण के लिए रविवार को चास बोकारो के सैंकड़ों कांवरिये रिमझिम बारिश के बीच गरगा और दामोदर नदी से जल उठा कर पैदल चिड़का धाम रवाना हुए. इसमें छोटे-छोटे बच्चों से लेकर युवक-युवतियां भी शामिल रहे. जल संकल्प कराने के बाद श्रद्धालु जयकारे लगाते हुए रवाना हुए. […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | July 23, 2018 6:20 AM
चास : बांग्ला सावन की पहली सोमवारी को जलार्पण के लिए रविवार को चास बोकारो के सैंकड़ों कांवरिये रिमझिम बारिश के बीच गरगा और दामोदर नदी से जल उठा कर पैदल चिड़का धाम रवाना हुए. इसमें छोटे-छोटे बच्चों से लेकर युवक-युवतियां भी शामिल रहे. जल संकल्प कराने के बाद श्रद्धालु जयकारे लगाते हुए रवाना हुए.
रात भर पैदल चलने के बाद सोमवार को भगवान भोलेनाथ को जल अर्पण करेंगे. चास, चंदनकियारी सहित आसपास क्षेत्र के लोगों के लिए पुरुलिया स्थित चिड़का धाम आस्था का केंद्र है. पूरे सावन माह जलार्पण के लिए लोग जाते हैं. श्रद्धालुओं का मानना है कि चिड़का धाम के गौरीनाथ मंदिर परिसर में रात भर धरना देने पर मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है. इसलिए पुरुलिया जिला के अलावा बोकारो, जमशेदपुर, रांची, धनबाद के श्रद्धालु भी मनोवांछित फल पाने के लिए पूजा करने और धरना देने यहां पहुंचते हैं.
प्रचलित है यहां की कहानी : चिड़का धाम का इतिहास बहुत पुराना है. पुस्तिका शिव रहस्य के मुताबिक 400 वर्ष पूर्व पुरुलिया जिला का यह क्षेत्र जंगल था. यहीं एक जोरिया है, जहां श्मशान काली साधक चड़क मुनि रहते थे. इनके नाम पर ही चिड़का गांव बसा हुआ है. मंदिर वाली जमीन हुलका गांव निवासी गौरी नाथ महतो की थी. इस जगह पर चरवाहा गाय सहित अन्य पशुओं को चराने ले जाया करते थे. काला रंग की एक गाय झाड़ी में प्रतिदिन अपने थन का दूध अपने-आप गिरा देती थी.
घर में गौरीनाथ महतो द्वारा दुहने पर गाय के थन से दूध नहीं निकलता था. इस पर उसने चरवाहा को गाय पर विशेष रूप से नजर रखने की बात कही. चरवाहा ने दूसरे ही दिन गाय को झाड़ी में अपने-आप दूध गिराते हुए देखा तो इसकी जानकारी गौरीनाथ महतो को दी. इसके बाद गौरीनाथ महतो ने आकर देखा और झाड़ी को हटाया तो वहां एक शिवलिंग था. उन्होंने तुरंत झाड़ियां कटवा कर एक सुंदर झोंपड़ी का निर्माण करा दिया.
एक दिन भगवान भोलेनाथ गौरीनाथ के सपनों में आये और कहा कि सच्चे मन से भक्ति भाव से उनकी यहां पूजा करेगा, उसकी हर इच्छा पूरी होगी. इसके बाद गौरीनाथ ने ब्राह्मणों को बुला कर पूजा शुरू करायी. गौरीनाथ ने चार हजार मन धान की जमीन दान देकर चिड़का धाम गांव बसाया. इस गांव में सभी जाति के लोगों को बसाया गया.