रांची : राजधानी से सटे खूंटी में पीएलएफआइ के उग्रवादियों का आतंक बढ़ गया है. जिला बनने के बाद छह साल में 509 लोग मारे जा चुके हैं. यहां के लोगों की जिंदगी उग्रवादियों व नक्सलियों के रहमो-करम पर है. औसतन हर साल 84 लोगों की हत्या की गयी. हाल यह है कि शहरी क्षेत्र भी शाम सात बजते-बजते सुनसान हो जाता है.
ग्रामीण इलाकों में तो दिन में भी जाने से लोग डरते हैं. ग्रामीण इलाकों के साथ ही शहरी क्षेत्र से भी सक्षम लोग दूसरे जिलों में पलायन कर रहे हैं. हालत यहां तक बिगड़ गयी है कि पीएलएफआइ के एक फरमान पर आठ दिनों तक यहां के करीब 1000 स्कूल बंद रहे.
शाम सात बजे के बाद शहर में सन्नाटा : खूंटी में ग्रामीण इलाके से लेकर जिला मुख्यालय तक में शाम सात बजे के बाद दुकानें बंद हो जाती हैं. शहर के छोटे-बड़े होटल समेत ब्रेड, बिस्किट, चाय-पान की दुकानें भी बंद हो जाती हैं. लोग अपने घरों में कैद हो जाते हैं.
रात आठ बजे के बाद तो शहर में कोई किसी को रास्ता बताने से भी डरता है. लोग अगल-बगल से गुजरनेवाले लोगों से डरते हैं. पता नहीं कब कौन किस बात पर गोली मार दे. गांव के लोग भी रात में भय से घर से बाहर निकलने से परहेज करते हैं.
पुलिस जेल में नहीं रख सकी राजकमल को
खूंटी में उग्रवादियों के खिलाफ पुलिस का रवैया भी लापरवाहीवाला रहा है. तीन साल पहले पुलिस ने पीएलएफआइ में दिनेश गोप के बाद दूसरे नंबर पर रहे राजकमल गोप को गिरफ्तार किया था. उसके खिलाफ दो दर्जन से अधिक हत्या के मामले रांची व खूंटी के विभिन्न थानों में दर्ज थे. लेकिन पुलिस उसे सजा नहीं दिला सकी. पुलिस के सीनियर अफसर भी मानते हैं कि राजकमल के मामले में निश्चित रूप से पुलिस से लापरवाही हुई. छोटे-छोटे अपराधियों पर पुलिस सीसीए लगाती है, लेकिन राजकमल के मामले में यह कार्रवाई भूल गयी. सभी मामलों में जमानत मिलने के बाद लोकसभा चुनाव से पहले राजकमल गोप जेल से बाहर आ गया. जेल से निकलने के बाद वह एक राजनेता के साथ घूम रहा है. खूंटी में उस पर प्राथमिकी भी दर्ज की गयी.
पीएलएफआइ : शहर व भीड़-भाड़ के बीच हत्याएं
वर्ष 2010 : लापुंग के सहेदा में छठ घाट पर दो लोगों की हत्या
वर्ष 2013 : चुटिया थाना के सामने विजेंद्र सिंह की गोली मार कर हत्या
18 जून 2013 : खूंटी में महुआ व्यवसायी पवन साहू की हत्या
21 जुलाई 2013 : कर्रा में महुआ व्यवसायी नंदु साहु की हत्या
29 सितंबर 2013 : कर्रा के जम्हार बाजार में सरेआम नौरिंग निवासी धनेश्वर साहू व पुत्र शिवा साहू की हत्या
01 नवंबर 2013 : खूंटी शहर में लाह व्यवसायी बनवारी साहू, उनके पुत्र और एक ग्रामीण की हत्या
06 फरवरी 2014 : खूंटी शहर में बस मालिक बिरेंद्र जायसवाल की हत्या.
08 मार्च 2014 : बरही में आजसू नेता तिलेश्वर साहू की गोली मार कर हत्या.
13 मार्च : तपकारा में दो युवकों की हत्या.
15 मार्च : मुरहू के एदेलडीह में पूना ऑड़ेया एवं उनकी पत्नी वासी ऑडेया की हत्या.
16 मार्च : खूंटी के टकरा निवासी राजेंद नाग की हत्या.
24 मार्च : कर्रा के दीगादोन में दसवा हेरेंज एवं पत्नी बसंती हेरेंज की हत्या.
27 मार्च : मुरहू के कूड़ापूर्ति में राम मुंडा की गोली मारकर हत्या
27 मार्च : कर्रा में दो की हत्या.
01 अप्रैल : रनिया में एक महिला की हत्या.
01 मई : मुरहू के कुलीपीड़ी में बारिका कंडीर की हत्या.
09 मई : तोरपा में पीएलएफआइ के शिवा गुड़िया की हत्या
12 मई : अड़की के राजाबाजार में महेंद्र मुंडा की हत्या.
18 मई : खूंटी के हुटार चौक में एक युवक की गोली मारकर हत्या
24 मई : खूंटी के सरजोमा के समीप अज्ञात युवक का सिर कलम कर हत्या
24 मई : खूंटी थाना के चौकीदार करम सिंह बड़ाईक को गोली मारी
29 मई : अड़की के कोचांग में सांदू सोय की हत्या
01 जून : खूंटी के बेलाहाथी रोड अज्ञात युवक की हत्या
03 जून : कर्रा के जलटंडा में जोलेन संगा की हत्या
04 जून : खूंटी के जोजोहातू में दुबराज मानकी, नागी मानकी व सूर्या मुंडा की हत्या
05 जून : मुरहू के कूदासूद में अज्ञात युवक की गर्दन रेत कर हत्या
06 जून : कर्रा के डुमरगड़ी निवासी मुन्ना महली की हत्या
08 जून : मुरहू के कोलंदा जंगल में महिला की हत्या
21 जून : खूंटी के भाजपा कार्यकर्ता सहदर सिंह की कर्रा में हत्या
23 जून : खूंटी के सिंबूकेल में अधेड़ की हत्या
25 जून : तोरपा में बुजूर्ग इलियास गुड़िया की हत्या
27 जून : मुरहू में अज्ञात युवक की गला रेतकर हत्या
27 जून : तोरपा के रोड़ो में हादू कंडुलना की हत्या
28 जून : अड़की के बीरबांकी बाजार में गोपाल मुंडा व विश्रम मुंडा की हत्या
28 जून : खूंटी के तिरला में जतानी मुंडा की हत्या
पीएलएफआइ के फरमान से स्कूलों के बंद या प्रभावित होने की कोई सूचना नहीं है. सभी स्कूलों के खुले होने की खबर है. रिपोर्ट जुटा रही हूं, तब विस्तृत जानकारी दी जा सकती है.
नीलम आयलिन टोप्पो जिला शिक्षा अधीक्षक, खूंटी
