रांची: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और डीजीपी राजीव कुमार की हत्या की धमकी देने के मामले में जमशेदपुर पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है. इनमें एक अधिवक्ता सुधीर कुमार ठाकुर और दूसरा उनके लिए काम करनेवाला गुंजन कुमार शामिल है. दोनों जमशेदपुर के रहनेवाले हैं.
डीजीपी राजीव कुमार ने शुक्रवार को पत्रकारों को बताया : सुधीर कुमार ठाकुर के बयान पर पुलिस ने जला हुआ मोबाइल सेट और सिम (नंबर 8407092840) बरामद कर लिया है. धमकी देने में इसी मोबाइल का प्रयोग किया गया था. डीजीपी ने बताया : जेआरडी टाटा गोलंबर के पास स्थित नाले से प्रभाष मिश्र के नाम बना फरजी ड्राइविंग लाइसेंस भी बरामद कर लिया गया है. इस पूरे मामले में सरायकेला के समाज कल्याण पदाधिकारी संजय कुमार ठाकुर की संलिप्तता की जांच की जा रही है. डीजीपी के साथ आइजी प्रोविजन अनुराग गुप्ता, जमशेदपुर के एसएसपी अमोल वेणुकांत और सिटी एसपी एस कार्तिक भी प्रेस कांफ्रेंस में उपस्थित थे.
प्रभाष को फंसाने के लिए धमकी : जमशेदपुर के एसएसपी ने बताया : अधिवक्ता सुधीर कुमार ठाकुर और सरायकेला के समाज कल्याण पदाधिकारी संजय कुमार ठाकुर मित्र हैं. आदित्यपुर निवासी प्रभाष मिश्र जिला समाज कल्याण पदाधिकारी के कार्यालय में कार्यरत लिपिक सुनील कुमार झा का साला है. संजय ठाकुर और सुनील झा के बीच अनबन थी. संजय ने सुनील के खिलाफ कई कार्रवाई की है. इस कारण प्रभाष मिश्र ने आरटीआइ के तहत आवेदन देकर समाज कल्याण पदाधिकारी संजय ठाकुर के बारे कई तरह की जानकारी मांगी थी. आरटीआइ में आवेदन आने से समाज कल्याण पदाधिकारी परेशान थे. पूछताछ में अधिवक्ता सुधीर कुमार ठाकुर ने बताया कि प्रभाष मिश्र को फंसाने के लिए पहले चाकुलिया बीडीओ और बाद में डीजीपी के मोबाइल पर धमकी भरा मैसेज भेजा गया. योजना थी कि डीजीपी को धमकी देने के बाद प्रभाष मिश्र को जेल जाना पड़ेगा. प्रभाष मिश्र को फंसाने के लिए पूर्व में भी गुंजन कुमार के जरिये सरायकेला कोर्ट में दो मामला दर्ज कराये गये थे. उसके बयान की सत्यता की जांच की जा रही है.
एक किलो मीट के बदले बेच रहा था मोबाइल
डीजीपी ने बताया : मुख्यमंत्री और डीजीपी की हत्या की खबर अखबारों में छपने के बाद अधिवक्ता सुधीर कुमार ठाकुर और गुंजन कुमार परेशान हो गये थे. इस कारण सुधीर शुक्रवार सुबह अपना मोबाइल बेचने टेल्को में मीट बेचनेवाले सुमन कुमार के पास पहुंचा. एक किलो मीट मांगा और इसके बदले मोबाइल ले लेने को कहा. सुमन कुमार ने मोबाइल सेट लेकर उसमें अपना सिम डाला और अपने भाई को इसकी जानकारी दी. उसके भाई ने यह कहते हुए मोबाइल लेने से मना कर दिया कि यह चोरी का हो सकता है. इसके बाद सुमन ने अधिवक्ता सुधीर को मोबाइल वापस कर दिया. बाद में सुधीर ने मोबाइल सेट और सिम को जला दिया. इस बीच मोबाइल सेट का इस्तेमाल होते ही पुलिस सुमन के पास पहुंच गयी और उससे पूछताछ की. पुलिस को यह भी पता चला कि सिम (8407092840) खरीदने के लिए जिस कागजात का इस्तेमाल किया गया था, उस कागजात के जरिये एक और सिम टेल्को इलाके के सिम विक्रेता आयुष अमन से खरीदा गया है. आयुष अमन और सुमन कुमार से पूछताछ के दौरान पहले गुंजन का नाम सामने आया. पकड़ में आने के बाद गुंजन ने मामले में अधिवक्ता के शामिल होने की बात बतायी. इसके बाद अधिवक्ता सुधीर ठाकुर को हिरासत में लेकर पूछताछ की गयी, तब पूरा मामला सामने आ गया.
सरायकेला एसपी का बायोडाटा मांगा लिया था
प्रभाष मिश्र को फंसाने के लिए अधिवक्ता सुधीर कुमार ठाकुर ने प्रभाष मिश्र के नाम से फरजी ड्राइविंग लाइसेंस समेत कई दस्तावेज तैयार कर लिये थे. करीब एक माह पहले सुधीर ने प्रभाष मिश्र के नाम से आरटीआइ के तहत आवेदन देकर सरायकेला एसपी मदनमोहन लाल के संबंध में कई जानकारी मांगी थी. इसके पीछे का उद्देश्य यह था कि परेशान होकर पुलिस प्रभाष मिश्र को फंसाने का काम करेगी, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. जो जानकारी मांगी गयी थी, वह सरायकेला एसपी के कार्यालय से डाक के जरिये प्रभाष मिश्र के घर पहुंच गयी. करीब 15 दिन पहले प्रभाष मिश्र ने सरायकेला एसपी से मिल कर उन्हें यह जानकारी दी थी कि उसने तो इस तरह की सूचना मांगी ही नहीं है. किसी ने उसे परेशान करने की नियत से ऐसा किया है.
गिरफ्तार लोगों में अधिवक्ता सुधीर कुमार ठाकुर और उसके लिए काम करनेवाला गुंजन कुमार
अधिवक्ता सुधीर कुमार ठाकुर ने ही दी थी धमकी
गुंजन ने बनवाया था प्रभाष मिश्र के नाम पर फरजी ड्राइविंग लाइसेंस
सरायकेला के समाज कल्याण पदाधिकारी की संलिप्तता की जांच शुरू
प्रभाष मिश्र को फंसाने की कोशिश की थी सुधीर ने
मामले में नाम
सामने आये हैं
संजय कुमार ठाकुर (सरायकेला जिला समाज कल्याण पदाधिकारी)
सुनील कुमार झा (कल्याण पदाधिकारी कार्यालय में लिपिक)
प्रभाष मिश्र (लिपिक सुनील कुमार झा का साला)
