World book fair Delhi : विश्व पुस्तक मेले में कहानी-संग्रह 'घाम' का लोकार्पण, देवेंद्र चौबे ने कहा-श्यामल की कहानियों में इकहारा यथार्थ नहीं

श्यामल की कहानियां हिंदी साहित्य के पूरे कथा-फलक पर सबसे अलग हैं जो हर स्तर पर बनी-बनाई धारणाओं की धज्जियां उड़ाती चलती हैं.

World book fair Delhi : प्रसिद्ध आलोचक जेएनयू के प्राध्यापक प्रो देवेंद्र चौबे ने कहा है कि श्याम बिहारी श्यामल की कहानियां यथार्थ का इकहरा अंकन नहीं हैं. उनमें वस्तुयथार्थ और भूगोल के साथ ही इतिहास और दर्शन-बोध जिस तरह साथ-साथ अंकित होते चलते हैं, यह साहित्य के वर्तमान फलक पर सबसे अलग है. प्रमुख साहित्यिक पत्रिका ‘पाखी’ के कार्यकारी संपादक व प्रमुख आलोचक पंकज शर्मा ने कहा कि हिंदी साहित्य के व्यापक फलक पर श्यामल की कहानियों के माध्यम से पलामू और झारखंड जिस प्रभावशाली ढंग से अंकित हुआ है, वह उल्लेखनीय है. वे विश्व पुस्तक मेले में गुरुवार की देरशाम राजपाल एंड संज के सुसज्जित सभा-मंच पर श्यामल के सद्यःप्रकाशित कहानी संग्रह ”घाम” का लोकार्पण करने के बाद अपने उद्गार व्यक्त कर रहे थे.

धारणाओं की धज्जियां उड़ाती हैं श्यामल की कहानियां


डॉ शर्मा ने कहा कि श्यामल की कहानियां हिंदी साहित्य के पूरे कथा-फलक पर सबसे अलग हैं जो हर स्तर पर बनी-बनाई धारणाओं की धज्जियां उड़ाती चलती हैं. कैसा भी धुरंधर पाठक श्यामल की किसी भी कहानी को पढ़ते हुए, आगामी किसी घटना-संदर्भ का जरा भी पूर्वाभास नहीं कर सकता. हर अगला क्षण अनपेक्षित चित्र लेकर आता है. और हर क्षण-चित्र जितना दिखाई पड़ता है उससे कई गुणा अधिक सुनाई पड़ता है. इतना ही नहीं, वह कई-कई आयामों में मन पर अपनी गहरी छाप छोड़ जाता है. ‘घाम’ में पलामू की झारखंड-भूमि से लेकर बनारस की धरती तक, पूर्वांचल का जीवन और उसके संघर्ष की कहानियां संकलित हुई हैं.

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कहानियों के महत्व पर हुई चर्चा


World book fair Delhi में लोकार्पण और परिचर्चा कार्यक्रम का शुभारंभ राजपाल एंड संज की प्रकाशन-प्रमुख मीरा जौहरी ने श्यामल और उनके नव प्रकाशित संग्रह के परिचय के साथ किया. प्रसिद्ध कथाकार सविता सिंह ने कहानियों का महत्व और उनके सौष्ठव की चर्चा की. उन्होंने लेखक की श्रमसाध्य दिनचर्या का रोचक शब्द-चित्र खींचा. कथाकार आशा प्रभात ने श्यामल को बधाई दी और उनके साहित्य के प्रति अपनी गहरी जिज्ञासा व्यक्त की. इससे पूर्व पलामू की धरती से जुड़े रणविजय सिंह ने अपने बौद्धिक मित्रों के साथ ‘राजपाल’ के स्टॉल पर पहुंच कर ‘घाम’ के लिए रचनाकार श्यामल को बधाई दी और उपेक्षित भूगोल को साहित्य के बड़े फलक चित्रित करने पर अपना आभार जताया.

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लेखक के बारे में

Author: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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