1. home Hindi News
  2. state
  3. delhi ncr
  4. misdemeanor case chinmayanand will not get copy of womans statement supreme court revokes high court order ksl

बलात्कार मामला : चिन्मयानंद को नहीं मिलेगा महिला के बयान की प्रति, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को किया निरस्त

By Agency
Updated Date
सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट
twitter

नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने बलात्कार मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता चिन्मयानंद को मजिस्ट्रेट के समक्ष दिये गये पीड़ित के बयान की प्रति उपलब्ध कराने का इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश गुरुवार को निरस्त कर दिया. न्यायालय ने कहा कि यौन शोषण के मामलों में ''अत्यधिक गोपनीयता बनाये रखने की आवश्यकता है.'' हालांकि, शीर्ष अदालत ने इस तथ्य का संज्ञान लिया है कि हाईकोर्ट के सात नवंबर, 2019 के आदेश के खिलाफ कथित बलात्कार पीड़ित की सुप्रीम कोर्ट में अपील के समय तक आरोपित को पीड़ित द्वारा दंड प्रक्रिया संहिता की धारा-164 के तहत न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज कराये गये बयान की प्रमाणित प्रति उपलब्ध करायी जा चुकी थी.

न्यायमूर्ति उदय यू ललित, न्यायमूर्ति विनीत सरन और न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट की पीठ ने अपने फैसले में कहा, ''हालांकि, धारा 164 के तहत दर्ज बयान की प्रति आरोपित को दे दी गयी है, हाईकोर्ट के इस आदेश को निरस्त करना चाहिए और यह प्रतिपादित करना चाहिए कि किसी भी परिस्थिति में अदालत द्वारा मामले का संज्ञान लेने के बाद उचित आदेश पारित किये बगैर किसी भी हालत में धारा-164 के तहत दर्ज बयान की प्रति नहीं दी जा सकती है.''

पीठ ने अपने फैसले मे कहा कि मामले में आरोप पत्र दाखिल होने के आधार पर आरोपित दंड प्रक्रिया संहिता की धारा-164 के तहत दर्ज बयान सहित किसी भी प्रासंगिक दस्तावेज की प्रति हासिल करने का उस समय तक हकदार नहीं है, जब तक निचली अदालत ने आरोप पत्र का संज्ञान लेकर आरोपित को मुकदमे का सामना करने के लिए सम्मनया वारंट जारी नहीं कर दिये हों. शीर्ष अदालत ने कहा, ''हमारी राय में , हाईकोर्ट ने इस न्यायालय द्वारा दिये गये निर्देशों, विशेषकर ऐसे मामले में जहां आरोपित के खिलाफ कथित यौन शोषण के आरोप हैं, को समझने में पूरी तरह गलती कर दी है. ऐसे मामलों में अत्यधिक गोपनीयता बनाये रखने की जरूरत है. हमारी राय में हाईकोर्ट इस संबंध में पूरी तरह विफल रहा है.''

न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष धारा-164 के तहत दर्ज बयान मुकदमे की सुनवाई के दौरान स्वीकार्य साक्ष्य है और जांच के दौरान पुलिस को दिये गये बयान की तुलना में इसमें ज्यादा वजन होता है. शीर्ष अदालत ने दंड प्रक्रिया संहिता के विभिन्न प्रावधानों और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लेख किया ओर कहा कि आरोपित जांच से संबंधित किसी भी दस्तावेज या बयान की प्रति प्राप्त करने का उससमय तक हकदार नहीं है, जब तक कि निचली अदालत ने आरोप पत्र का संज्ञान लेकर मुकदमे की सुनवाई शुरू नहीं कर दी हो. हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ शाहजहांपुर निवासी कानून की छात्रा की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 15 नवंबर को ही इस आदेश पर रोक लगा दी थी और राज्य सरकार तथा चिन्मयानंद से जवाब मांगा था.

न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को इस महिला के आरोपों की जांच के लिए आईजी स्तर के अधिकारी की अध्यक्षता में विशेष जांच दल गठित करने का निर्देश भी राज्य सरकार को दिया था. इस महिला ने चिन्मयानंद पर उसे परेशान करने के आरोप लगाये थे और इसके बाद वह लापता हो गयी थी. बाद में वह राजस्थान में मिली थी. विशेष जांच दल ने इस मामले में चिन्मयानंद को 21 सितंबर, 2019 को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था. कानून की इस 23 वर्षीय छात्रा पर भी कथित रूप से जबरन उगाही का मामला दर्ज किया गया था.

Share Via :
Published Date
Comments (0)
metype

संबंधित खबरें

अन्य खबरें