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बैद्यनाथ मंदिर में दर्शन की अनुमति देने पर विचार करे सरकार : सुप्रीम कोर्ट

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बैद्यनाथ मंदिर में दर्शन की अनुमति देने पर विचार करे सरकार
बैद्यनाथ मंदिर में दर्शन की अनुमति देने पर विचार करे सरकार
सुप्रीम कोर्ट

नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को झारखंड सरकार से कहा कि देवघर स्थित ऐतिहासिक बाबा बैद्यनाथ ज्योर्तिलिंग मंदिर और बासुकीनाथ स्थित बाबा बासुकीनाथ मंदिर को फिर से खोलने पर विचार करे. कोविड-19 महामारी के कारण इन मंदिरों में श्रद्धालुओं का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया था. शीर्ष अदालत ने कहा कि अराधना के लिए वर्चुअल ‘दर्शन' वास्तविक दर्शन जैसा नहीं है और श्रृद्धालुओं को सीमित संख्या में अनुमति दी जा सकती है.

शीर्ष अदालत की राय थी कि चूंकि अब देश में सारी चीजें फिर से खुल रही हैं, इसलिए कम से कम महत्वपूर्ण अवसरों पर मंदिर, मस्जिद, गिरिजाघर और दूसरे धार्मिक स्थलों को भी खोला जाना चाहिए. न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा, न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की पीठ ने भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की याचिका पर इन ऐतिहासिक मंदिरों को फिर से खोलने और वर्चुअल दर्शन की बजाय देवघर में श्रावणी मेला आयोजित करने की अनुमति देने से इंकार करने के झारखंड हाइकोर्ट के तीन जुलाई के आदेश में के मद्देनजर यह बात कही.

  • झारखंड हाइकोर्ट के आदेश को चुनौती देनेवाली याचिका निष्पादित 

  • कोर्ट बोला- देश में सारी चीजें फिर से खुल रहीं है, तो धार्मिक स्थल क्यों नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा 

  • मंदिरों का वर्चुअल ‘दर्शन' वास्तविक दर्शन जैसा नहीं 

  • महत्वपूर्ण अवसरों पर मंदिर, मस्जिद, गिरिजाघर और दूसरे धार्मिक स्थलों को भी खोला जाना चाहिए 

  • सामाजिक दूरी और अन्य दिशा-निर्देशों का ध्यान रखने की जरूरत

पीठ ने इस संबंध में दायर याचिका का निस्तारण करते हुए झारखंड सरकार से कहा कि जब देश में चीजें खुलनी शुरू हो गयी हैं, तो उसे मंदिरों को खोलने पर विचार करना चाहिए. अदालत ने कहा कि देवघर मंिदर में बड़ी संख्या में पुजारियों को प्रवेश की अनुमति दी जा सकती है, तो सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराते हुए अलग-अलग समय में कुछ सौ लोगों को ऑन लाइन बुकिंग के आधार पर दर्शन की अनुमति देने पर सरकार विचार करे.

सांसद दुबे ने अपनी अपील में कहा था कि उच्च न्यायालय इस तथ्य की ठीक से सराहना करने में विफल रहा कि बाबा बैद्यनाथ मंदिर और बाबा बासुकीनाथ मंदिर में शिव भक्तों की आस्था अतुलनीय है और विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में इसका प्रमुखता से वर्णन किया गया है.

याचिकाकर्ता की दलील- पुजारियों को इजाजत, तो श्रद्धालुओं को क्यों नहीं

याचिकाकर्ता गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे के वकील का कहना था कि प्रशासन मंदिर में पंडों को अनुमति दे रहा है, लेकिन श्रद्धालु अंदर नहीं जा सकते. ऐसा क्यों? सुप्रीम कोर्ट ने इस पर अप्रसन्नता व्यक्त करते हुए झारखंड सरकार के वकील सलमान खुर्शीद से सवाल किया कि इस तरह से श्रद्धालुओं को अलग रखने की अनुमति कैसे दी जा सकती है?

झारखंड सरकार बोली- मुश्किल से एक दर्जन पुजारी और स्थानीय लोग

झारखंड सरकार का पक्ष रखते हुए वकील सलमान खुर्शीद व तापेश कुमार सिंह ने तीस हजार के आंकड़े को गलत बताया और कहा कि मुश्किल से एक दर्जन पुजारी और स्थानीय लोग थे, जिन्होंने इस साल पारंपरिक तरीके से आराधना की. खुर्शीद ने कहा कि राज्य सरकार ने कोरोना के कारण सभी धार्मिक स्थलों को बंद रखने का फैसला किया है. जल्द ही पूर्ण लॉकडाउन की घोषणा कर सकती है.

सुप्रीम कोर्ट का राज्य सरकार को सुझाव

  • श्रद्धालुओं को सीमित संख्या में मंदिर में जाने देने पर राज्य सरकार व्यवस्था बना सकती है.

  • इसके लिए श्रद्धालुओं को ई-टोकन जारी करना भी एक तरीका हो सकता है.

  • उज्जैन के महाकाल मंदिर की तरह यहां भी व्यवस्था बनायी जा सकती है.

  • न केवल सावन के बचे हुए दो दिनों के लिए, बल्कि आगामी पूर्णमासी और भादो महीने में नयी व्यवस्था लागू करने की कोशिश हो.

  • अन्य राज्यों के लोगों को नहीं, तो कम-से-कम अपने राज्य के लोगों को दर्शन का अवसर मिले.

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