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दिल्ली कस्टम विभाग ने किया करोड़ों की तस्करी का भंडाफोड़, विदेशी ब्रांड सहित 37 लाख से अधिक सिगरेट जब्त

दिल्ली कस्टम विभाग ने एक औद्यौगिक परिसर में छापेमारी कर करोड़ों रुपये के सिगरेट जब्त किये हैं. इनमें से काफी संख्या में विदेशी ब्रांड के सिगरेट हैं. ये सभी सिगरेट स्मगलिंग कर यहां लाये गये थे. मालिक से जब दस्तावेज दिखाने को कहा गया तो वह नहीं दिखा पाया. मालिक को भी अरेस्ट कर लिया गया है.

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
जब्त किये गये सिगरेट.
जब्त किये गये सिगरेट.
PIB

भारतीय सीमा शुल्क ने कुल सात साल से अधिक की संख्या में विदेशी ब्रांड जेरम ब्लैक के सिगरेट जब्त किये हैं. इसकी अनुमानित कीमत करीब एक करोड़ रुपये है. इस विदेशी ब्रांड के सिगरेट के साथ कई भारतीय ब्रांड के सिगरेट भी जब्त किये गये. सभी की संख्या कुल 37 लाख से अधिक हैं. जिन ब्रांड के सिगरेट जब्त किये गये उनमें गोल्ड फ्लेम, गोल्ड क्लॉक, फ्लेम, फन गोल्ड, इम्प्रेशन, पेलिकन और गोल्ड फाइटर हैं.

मालिक नहीं दिखा पाया दस्तावेज

इस सिगरेट के मालिक द्वारा इनकी खरीद के बारे में कोई भी दस्तावेज नहीं दिखाये जा सके. जहां से यह बरामद किया गया, उस परिसर को किराया पर लेने वाले शख्स को भी गिरफ्तार कर लिया गया है और उससे आगे की पूछताछ की जा रही है. दिल्ली सीमा शुल्क (निवारक) के मुख्य आयुक्त सुरजीत भुजबल ने कहा कि देश में सिगरेट की तस्करी के संबंध में जीरो टॉलरेंस है.

तस्करी से सरकार को होता है नुकसान

उन्होंने कहा कि सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद (विज्ञापन और व्यापार और वाणिज्य, उत्पादन, आपूर्ति और वितरण के विनियमन) अधिनियम, 2003 के प्रावधानों के संबंध में और सख्त उपायों का पालन किया जा रहा है. तस्करी का हमारी अर्थव्यवस्था पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है. भारतीय सीमा शुल्क भारत में सिगरेट की अवैध तस्करी से निपटने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है.

दिल्ली के औद्योगिक क्षेत्र से हुई बरामदगी

दिल्ली सीमा शुल्क निवारक आयुक्तालय के अधिकारियों को विदेशी ब्रांड की प्रतिबंधित सिगरेट के अवैध भंडारण और जीएसटी के भुगतान के बिना देशी सिगरेट की अवैध आपूर्ति के बारे में एक विशिष्ट खुफिया जानकारी प्राप्त होने के बाद छापेमारी की गयी थी. दिल्ली सीमा शुल्क निवारक के अधिकारियों ने दिल्ली के एक औद्योगिक क्षेत्र में गोदाम परिसर की तलाशी ली और इन सामानों को जब्त किया.

कर की होती है चोरी

पीआईबी की एक विज्ञप्ति में कहा गया कि सिगरेट की तस्करी में महाद्वीपों, देशों और प्रांतों के बीच हवाई या समुद्री परिवहन के माध्यम से इसका अवैध परिवहन शामिल है. आमतौर पर आयात और निर्यात पर करों और अन्य प्रतिबंधों को दरकिनार करने के उद्देश्य से इसकी तस्करी होती है. इससे तस्करों को इस वस्तु को कम कीमत पर फिर से बेचने की आजादी मिलती है और सीमा शुल्क की चोरी की जाती है, जिससे राज्यों को भी कर का नुकसान होता है.

तस्करी वाले सिगरेट मिलते हैं सस्ते

वर्तमान में 100 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय तस्करी वाले सिगरेट ब्रांड दुनिया भर से भारतीय बाजार में बाढ़ ला रहे हैं. ड्यूटी पेड सिगरेट की तुलना में तस्करी की गयी सिगरेट लगभग पांच गुना सस्ती है. उदाहरण के तौर पर कानूनी रूप से शुल्क भुगतान वाली सिगरेट की कीमत 330 रुपये प्रति दस सिगरेट और तस्करी वाली सिगरेट की कीमत 60 रुपये या 80 रुपये प्रति दस सिगरेट होगी.

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