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Delhi Air Pollution: प्रदूषण से दिल्ली की हवा हो रही जहरीली, फिर लागू हो सकता है ऑड-ईवन फॉर्मूला

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
दिल्ली प्रदूषण
दिल्ली प्रदूषण
फाइल फोटो

Delhi Air Pollution नयी दिल्ली : पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने और स्थानीय कारकों के कारण दिल्ली की हवा में प्रदूषण (Delhi Air Pollution) का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है. रविवार की सुबह दिल्ली में वायु गुणवत्ता ‘खराब' श्रेणी में दर्ज की गई. वातावरण में शनिवार को कुल ‘पीएम 2.5' कणों में से 19 फीसदी पराली जलाने की वजह से आए थे जो पहले के मुकाबले बढ़ गये हैं. ऐसा माना जा रहा है प्रदूषण को रोकने के लिए अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) की सरकार एक बार फिर से ऑड-ईवन फॉर्मूला लागू कर सकती है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि सुबह के समय में अब हवा में प्रदूषण को महसूस किया जा सकता है. बता दें कि हर साल इस मौसम में दिल्ली धुंध की चादर से ढक जाती है. वहां प्रदूषण का लेवल इतना बढ़ जाता है कि लोगों को घर से बाहर निकलने के लिए मास्क लगाने की सलाह दी जाती है. अभी पिछले दिनों ही केजरीवाल सरकार ने डीजल और पेट्रोल वाले जेनरेटर सेट के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है.

पिछले साल भी प्रदूषण से निजात पाने के लिए केजरीवाल सरकार ने दिल्ली में ऑड-इवन फॉर्मूला लागू किया था. इसके तहत दिल्ली की सड़कों पर एक दिन ऑड नंबर की प्राइवेट गाड़ियां चलती हैं और दूसरे दिन इवन नंबर की गाड़िया. सरकार का दावा था कि इससे प्रदूषण का लेवल कुछ कम हुआ था. वहीं जेनरेटर पर रोक लगाने के सरकार के फैसले का आसर आठ से 10 दिनों में देखने को मिलेगा.

शहर में सुबह साढ़े आठ बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 275 दर्ज किया गया. शनिवार को 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 287 दर्ज किया गया था. शुक्रवार को यह 239, बृहस्पतिवार को 315 दर्ज था जो इस वर्ष 12 फरवरी के बाद से सबसे ज्यादा खराब है. उस दिन एक्यूआई 320 था. शून्य और 50 के बीच एक्यूआई को 'अच्छा', 51 और 100 के बीच 'संतोषजनक', 101 और 200 के बीच ‘मध्यम', 201 और 300 के बीच 'खराब', 301 और 400 के बीच 'बहुत खराब' और 401 और 500 के बीच को 'गंभीर' माना जाता है.

प्रदूषण के लिए पराली जलाने को माना जाता है बड़ा कारक

मौसम विज्ञान विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि दिन के वक्त उत्तरपश्चिमी हवाएं चल रही हैं और पराली जलाने से पैदा होने वाले प्रदूषक तत्वों को अपने साथ ला रही है. रात में हवा के स्थिर होने तथा तापमान घटने की वजह से प्रदूषक तत्व जमा हो जाते हैं. पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की ‘वायु गुणवत्ता निगरानी एवं मौसम पूर्वानुमान तथा अनुसंधान प्रणाली' (सफर) के मुताबिक हरियाणा, पंजाब और नजदीकी सीमा पर स्थित क्षेत्रों में शनिवार को पराली जलाने की 882 घटनाएं हुईं.

प्रणाली की ओर से कहा गया कि राष्ट्रीय राजधानी की वायु गुणवत्ता पर पराली जलाने का प्रभाव सोमवार तक ‘काफी बढ़ सकता है.' अधिकारियों ने शनिवार को कहा था कि पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष इस मौसम में अब तक पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाएं अधिक हुई हैं जिसकी वजह धान की समयपूर्व कटाई और कोरोना वायरस महामारी के कारण खेतों में काम करने वाले श्रमिकों की अनुपलब्धता है.

Posted By: Amlesh Nandan.

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