हाजीपुर : मुकद्दस माह-ए-रमजान मंगलवार से शुरू हो गया. सोमवार को चांद नजर आने के बाद तरावीह की नमाज शुरू हो गयी, वहीं मंगलवार को रोजेदारों ने तल्ख मौसम के बीच पहला रोजा रखा. रोजे के साथ ही पहला असरा भी शुरू हो गया. रोजेदारों ने मस्जिदों में रमजान के पांच वक्तों की नमाज अदा की.
मरकज थाना मस्जिद इमाम मौलाना मकसूद कासमी ने कहा कि रोजा इबादत के साथ ही अच्छाई की सीख देता है. हदीस पाक में यह जिक्र आता है कि रमजान के मुकद्दस महीने में प्रत्येक रात में सुबहे सादिक आसमान से एक मुनादी यह एलान करता है कि अच्छाई मांगने वाले यह मांगना खत्म कर और खुशी मना कि तेरी दुआ कुबूल हो गयी है.
बुराई करने वाले बुराई करने से बाज आ और इबरत हासिल कर. कोई मगफिरत की तालिब उसकी तलब पूरी की जाये, कोई तोबा करने वाले की दुआ कुबूल की जाये, अल्लाह रमजानुल मुबारक की रात इफ्तार के वक्त साठ हजार गुनहगारों को दोजख से आजाद कर देता है और ईद उल फितर के दिन पूरे महीने के बराबर राजेदारों को गुनाहों की माफी दी जाती है. रमजान को लेकर शहर से लेकर ग्रामीण इलाके के तमाम मस्जिदें गुलजार होने लगी हैं.
नगर थाना क्षेत्र स्थित अंजुमन फलाहुल मुसलेमिन व पश्चिमी नूनगोला के रइस मंजिल में छह दिन, मरकज टाउन थाना मस्जिद में 21 दिन, चौक मस्जिद में 27 दिन, संगी मस्जिद में 25 दिन, पोखरा जामा मस्जिद में 29 दिन और अनवरपुर चौक मस्जिद में 25 दिन तरावीह पढ़ी जायेगी.
छोटे-छोटे बच्चे रख रहे रोजा : मुकद्दस माह-ए-रमजान के पहले दिन शहर के छोटे-छोटे बच्चों ने भी पहला रोजा रखा. पूर्वी नून गोला के मो सबीर आलम के आठ वर्षीय पुत्र व कक्षा दो के छात्र मो अनस, मो नासिर आलम की सात वर्षीय पुत्री व कक्षा एक की छात्रा वारिशा ने अपने परिजनों के साथ मंगलवार को पहला रोजा रखा. इन बच्चों ने सुबह में सहरी व शाम में इफ्तार के साथ खुदा की इबादत की. इन दोनों बच्चों ने पिछले वर्ष भी माह-ए-रमजान का पहला व आखिरी रोजा रखा था.
