सहदेई बुजुर्ग : प्रखंड मुख्यालय की एकमात्र जलमीनार आज भी अपने तारणहार के इंतजार में है. यहां करीब 20 वर्ष पहले तत्कालीन लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री स्व मुंशीलाल राय ने अपनी विभागीय योजना से इस जलमीनार की नींव रखी थी.
प्रखंड मुख्यालय के आसपास के लोगों को सस्ता एवं शुद्ध पेयजल मुहैया कराने के उद्देश्य से सरकार ने इसे सोलर प्लेट की ऊर्जा से संचालित करने का मन बनाया था. वर्ष 2010 में करीब एक करोड़ 35 लाख की लागत से सोलर प्लेट लगकर भी यह अब तक शोभा की वस्तु बनी हुई है. इसके ठीक एक सौ गज की दूरी पर पावरग्रिड एवं पावर सबस्टेशन कार्यरत है.
सरकारी मंशा और विभागीय उदासीनता के चलते बिजली की कोई कमी नहीं रहने के बावजूद यह करोड़ों की जलमीनार लोगों को पानी देने में विफल है. इस संबंध में अधिकारियों से बात करने पर राशि की कमी बतायी जा रही है, जबकि इसके संचालन के लिए आज तक कोई कर्मी भी बहाल नहीं किया गया.
विभाग ने बगल के ही ग्रामीण मुसाफिर राय को इस पंप की देख-रेख में लगा रखा है. श्री राय का कहना है कि उनका पारिश्रमिक वर्षों से बकाया है. इस कारण वह भी ठीक से इस पर ध्यान नहीं देते, जबकि दो कर्मी बहाल कर इस भीषण गर्मी में लोगों को प्यास की समस्या बहुत हद तक कम की जा सकती है.
इस जलमीनार की बोरिंग की लेयर क्षमता चार सौ से ऊपर है, जो स्वच्छ पानी देने में पूरी तरह सक्षम है. आज लोग लगभग 10 रुपये प्रति लीटर पानी खरीद कर पीने को विवश हैं, वहीं गरीब तबके एवं अनुसूचित जाति-महादलित वर्ग के लोग जिनके पास पानी खरीद कर पीने की क्षमता नहीं है वह विशूद्ध पानी पीने को मजबूर हैं, जबकि इसकी लागत करोड़ों रुपये है.
स्थानीय लोग इसे चालू कराने की काफी जरूरत महसूस कर रहे हैं. इस संबंध में मुिखया सरोज कुमारी ने कहा कि बंद पड़ी जलमीनार को चालू कराने के लिए कई बार विभाग को लिखा गया है. अब हम पीएचइडी के अभियंता से बात करेंगे. इसे चालू कराने के लिए जो भी कदम उठाना पड़ेगा हम उठायेंगे.
वहीं जिला पार्षद जसवीर सिंह ने कहा िक जिस उद्देश्य से यहां जलमीनार बनायी गयी थी वह पूरा नहीं हो पा रहा है. मैंने इस मुद्दे को डीएम के सामने रखा है. उन्होंने जल्द ही इससे जलापूर्ति शुरू कराने का आश्वासन दिया है. इस पर बात की जायेगी.
