हाजीपुर : गर्मी ने दस्तक दे दी है. जिले के ग्रामीण इलाकों खासकर दियारा इलाके के लोगों के मन में एक बार से आग का भय व्याप्त हो गया है. रोज कहीं न कहीं आग अपना कहर बरपा रही है.
पिछले एक पखवारे के दौरान दो सौ से ज्यादा घर अगलगी में जलकर राख हो चुकी है. अगलगी की इन घटनाओं ने सैकड़ों परिवारों की खुशियां पल भर में छीन लीं.
गंगा और गंडक के किनारे बसे वैशाली जिले में हर वर्ष आग और पानी कहर बरपाते हैं. सैकड़ों लोग बेघर हो जाते हैं, किसानों की मेहनत की सैकड़ों एकड़ फसल बर्बाद हो जाती है. गर्मी के मौसम में आग और बरसात के मौसम में बाढ़ व जलजमाव यहां के लोगों पर कहर बनकर टूटती है.
आग की भयावहता से वैशाली जिले के लोग पूरी तरफ वाकिफ हैं. यहां हर साल आग तबाही मचाती है और लाखों रुपये की संपत्ति जलकर राख हो जाती है. कभी लोगों के घर और उनमें रखे सामान आग की भेंट चढ़ जाते हैं तो कभी गाढ़ी मेहनत से खेतों में लगायी गयी लहलहाती फसल. कई बार तो जान-माल का नुकसान भी होता है. अगलगी जैसी घटना में पीड़ित परिवार को तत्काल राहत मुहैया कराने में भी प्रशासन के पसीने छूट रहे हैं.
अगलगी की अधिकतर घटनाएं वैसी बस्तियों में हो रही हैं, जहां घनी आबादी और झोंपड़ीनुमा घर हैं, जबतक दमकल की गाड़ी पहुंचती हैं, तब तक सबकुछ राख में तब्दील हो चुका होता है और पीछे रह जाती हैं सिर्फ सिसकियां.
जिला मुख्यालय हाजीपुर में भी कई ऐसे मुहल्ले हैं, जहां आग लगने की स्थिति में दमकल की गाड़ी आसानी से नहीं पहुंच सकती. जिले में अगलगी की घटनाओं के कारण, इनसे निबटने के संसाधन व तत्काल राहत मुहैया कराने की व्यवस्था को प्रभात खबर टोली ने खंगाला तो सामने अायी हकीकत.
कुछ प्राइवेट स्कूलों में है आग से बचाव की व्यवस्था: कुछ प्राइवेट स्कूलों में तो आग से बचाव की थोड़ी बहुत व्यवस्था भी है, लेकिन सरकारी स्कूलों में कहीं भी अग्निशमन यंत्र नहीं दिखता. नगर के हाइस्कूल हो या कॉलेज या फिर प्राइवेट स्कूल कहीं भी सिविल डिफेंस की प्रॉपर ट्रेनिंग नहीं दी जा रही है.
अलबत्ता जिन स्कूलों में स्काउट एवं गाइड के कैडेट हैं, वहां इसके गुर जरूर बताये गये हैं, लेकिन ट्रेडिशनल तरीके से. आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से कहीं भी इसकी विशेष ट्रेनिंग नहीं दी गयी. प्रशासन भी इस दिशा में उदासीन है.
किसी भी स्कूल की यह जांच नहीं होती कि वहां आग लगने पर बचाव के क्या-क्या उपाय हैं. नगर के कई प्राइवेट स्कूलों का दावा है कि उनके यहां आग से बचाव की व्यवस्था की गयी है. बच्चों को इसकी ट्रेनिंग भी दी गयी है.
सदर अस्पताल में नहीं है बर्न यूनिट
हर साल अगलगी की घटनाओं से करोड़ों की क्षति झेल रहे वैशाली जिले के सदर अस्पताल में कोई बर्न यूनिट नहीं है. पिछले तीन-चार वर्षों के दौरान दौरान अगलगी की घटनाओं में दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी है.
आग बुझाने के दौरान लोग घायल भी होते रहे हैं, लेकिन सदर अस्पताल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में बर्न यूनिट की व्यवस्था नहीं रहने के कारण घायल लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद पटना रेफर कर दिया जाता है.
कर्मियों की कमी के बारे में मुख्यालय को बताया है
कर्मियों का घोर अभाव में है. नियमानुसार फायर ब्रिगेड की गाड़ी पर एक चालक, एक हवलदार व चार सिपाही समेत छह लोगों की टीम को भेजना है, लेकिन कर्मियों की कमी की वजह से अगलगी की स्थिति एक गाड़ी के साथ दो ही कर्मियों को भेजा जाता है. इससे आग बुझाने में परेशानी होती है. इस संबंध में राज्य मुख्यालय और डीएम को सूचना दी गयी है.
नागेंद्र उपाध्याय, स्टेशन अधीक्षक
फायर ब्रिगेड, हाजीपुर
इन स्थानों पर लगी आग तो होगा भारी नुकसान, कर्मियों का टोटा झेल रहा अग्निशमन विभाग
हाजीपुर शहर की बसावट किसी कस्बे की तरह है. नगर के कई मुहल्ले या मार्केट ऐसे हैं, जहां आग लगने की स्थिति में फायर ब्रिगेड की गाड़ी को पहुंचने में काफी समय लग जाता है, तो कई जगह ऐसी भी हैं
जहां फायर ब्रिगेड की गाड़ियां पहुंच ही नहीं पाती हैं. छह वर्ष पूर्व नगर के गांधी चौक स्थित भागवत मार्केट में कपड़े के एक गोदाम में आग लग गयी थी. आग को काबू पाने में स्थानीय लोगों के साथ-साथ दमकल कर्मियों को भी काफी परेशानी उठानी पड़ी थी.
संकरी गलियों वाले इस मार्केट में आग स्थल पर फायर ब्रिगेड की गाड़ियां नहीं पहुंच पायी थीं. कुछ ऐसा ही हाल गुदरी बाजार के पीछे स्थित पोखरा मुहल्ला, नया टोला की है. अगर इस मुहल्ले में आग लग जाये तो फायर ब्रिगेड की गाड़ी यहां पहुंच ही नहीं सकती.
घनी आबादी के बीचोबीच संचालित हो रहे कई स्कूल
नगर की एक ट्रेजडी यह भी कि ज्यादातर पब्लिक स्कूल घनी आबादी वाले मुहल्ले या व्यस्ततम सड़कों के किनारे हैं. कई की लोकेशन तो ऐसी कि आग लगने पर बड़े दमकल की कौन कहे छोटा दमकल भी नहीं पहुंच सकता.
नगर के कचहरी रोड, बागमली, बागदुल्हन, गांधी आश्रम, पासवान चौक दिघी, एसडीओ रोड आदि पर कई स्कूल इसी तरह की लोकेशन में स्थित हैं.
आठ साल पहले नगर के बागदुल्हन स्थित एक प्राइवेट स्कूल के हॉस्टल में गैस सिलिंडर फटने की घटना में कई बच्चे गंभीर रूप से जख्मी हुए थे, लेकिन इस घटना से शैक्षणिक प्रतिष्ठानों ने कोई सबक नहीं लिया. अभी भी सरकारी एवं निजी स्कूलों में आग लगने पर बचाव के पुख्ता उपाय नहीं दिखायी देते.
