Fake Robbery Case in Triveniganj: त्रिवेणीगंज (सुपौल). शनिवार की शाम 75 हजार रुपये और मोटरसाइकिल लूट की सूचना से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया. शिकायतकर्ता ने दावा किया कि एटीएम से रुपये निकालकर घर लौटने के दौरान बदमाशों ने उसे घेर लिया और रुपये व बाइक लूटकर फरार हो गए. मामला दर्ज हुआ तो पुलिस ने जांच शुरू कर दी.
लेकिन घटनास्थल की जांच और स्थानीय लोगों से पूछताछ के बाद कहानी में ऐसा मोड़ आया, जिसने पुलिस को भी चौंका दिया. जिस लूट को लेकर पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही थी, वह पूरी घटना ही फर्जी निकली. पुलिस की जांच में शिकायतकर्ता पर ही झूठी लूट की कहानी गढ़ने का आरोप सामने आया.
मामले में पुलिस ने शिकायतकर्ता रंजीत कुमार को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है.
एटीएम से 75 हजार निकालने और लूट की बताई थी कहानी
मधेपुरा जिले के शंकरपुर थाना क्षेत्र के मोरा कबियाही वार्ड नंबर 10 निवासी रंजीत कुमार ने पुलिस को दिए आवेदन में बताया था कि शनिवार की शाम करीब पांच बजे वह त्रिवेणीगंज स्थित एटीएम से 75 हजार रुपये निकालकर मोटरसाइकिल से अपने घर जा रहा था.
उसके अनुसार, वंशी चौक स्थित लक्ष्मी धर्मकांटा के पास शंकरपुर थाना क्षेत्र के मोरा कबियाही वार्ड नंबर 10 निवासी मनोज यादव, अजय यादव और दो अज्ञात युवकों ने उसे घेर लिया.
आरोप लगाया गया कि बदमाशों ने उसकी मोटरसाइकिल संख्या बीआर 50 बी 3862 छीन ली और उसके पास मौजूद 75 हजार रुपये भी लूट लिये. इसके बाद धक्का देकर उसे गिरा दिया और बाइक व रुपये लेकर फरार हो गए.
शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की.
घटनास्थल पर नहीं मिला लूट का सुराग
लूट की सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम वंशी चौक पहुंची. पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आसपास के लोगों से पूछताछ की.
यहीं से मामले की कहानी पर पहला सवाल खड़ा हुआ.
स्थानीय लोगों ने पुलिस को बताया कि उन्हें वंशी चौक पर ऐसी किसी लूट की घटना की जानकारी नहीं है. जिस जगह पर कथित तौर पर लूट होने की बात कही गई थी, वहां मौजूद लोगों से भी पुलिस ने जानकारी जुटाई.
इसके बाद पुलिस का शक शिकायतकर्ता पर गहराने लगा.
पूछताछ में बदली पूरी कहानी
घटनास्थल की जांच और स्थानीय लोगों से पूछताछ के बाद पुलिस ने रंजीत कुमार से कड़ाई से पूछताछ की.
पुलिस के अनुसार, पूछताछ में रंजीत ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि उसने मनोज यादव और अजय यादव को फंसाने के लिए लूट की झूठी कहानी तैयार की थी.
इसके बाद पुलिस ने पूरे मामले की पृष्ठभूमि खंगाली तो लूट के पीछे बकाया पैसों का विवाद सामने आया.
मकई बिक्री के पैसे को लेकर था पुराना विवाद
पुलिस जांच में सामने आया कि रंजीत कुमार के पास नामजद आरोपियों का मकई बिक्री का पैसा काफी समय से बकाया था.
बताया गया कि बकाया राशि की मांग करने पर मनोज यादव और अजय यादव ने परिचित पांच लोगों की मौजूदगी में रंजीत की मोटरसाइकिल अपने पास रख ली थी.
उन्होंने रंजीत से बकाया राशि चुकाने को कहा था.
इसके बाद रंजीत ने कथित तौर पर दोनों को फंसाने के लिए लूट की झूठी प्राथमिकी दर्ज कराने की योजना बनाई.
यही योजना बाद में उसके लिए परेशानी का कारण बन गई.
आरोपियों को फंसाने के चक्कर में खुद गिरफ्तार
पुलिस के मुताबिक रंजीत ने पुराने लेनदेन के विवाद को लूट का रूप देने की कोशिश की. उसने पुलिस को बताया कि उसके साथ सड़क पर 75 हजार रुपये और मोटरसाइकिल की लूट हुई है.
लेकिन घटनास्थल की जांच और स्थानीय लोगों के बयान से पुलिस को कथित लूट की कहानी पर संदेह हुआ. इसके बाद पूछताछ में पुलिस को मामले की दूसरी तस्वीर सामने आई.
मामले में शनिवार की रात ही पुलिस ने शिकायतकर्ता रंजीत कुमार को गिरफ्तार कर लिया.
Fake Robbery Case in Triveniganj: थानाध्यक्ष बोले- झूठी प्राथमिकी दर्ज कराने के आरोप में गिरफ्तारी
त्रिवेणीगंज थानाध्यक्ष राकेश कुमार ने बताया कि योजना बनाकर झूठी लूट की प्राथमिकी दर्ज कराने के आरोप में सूचक रंजीत कुमार को गिरफ्तार किया गया है.
उन्होंने बताया कि गिरफ्तार आरोपी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है.
पुलिस की इस कार्रवाई से साफ है कि लूट की शिकायत दर्ज कराने के बाद जांच में सामने आने वाले तथ्यों ने पूरे मामले की दिशा बदल दी. अब मामले में पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है.
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