राघोपुर (सुपौल) : बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में शिक्षक की भूमिका केवल पाठ पढ़ाने तक सीमित नहीं है. शिक्षक के हाव-भाव, बोलने, व्यवहार करने और जीवन जीने के तरीके का सीधा प्रभाव विद्यार्थियों पर पड़ता है. ऐसे में बच्चों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ अपने आचरण से भी शिक्षा देने की जरूरत है. आचरण से मिलने वाली शिक्षा शब्दों से कहीं अधिक प्रभावशाली होती है.
उक्त बातें माउंट आबू, राजस्थान से प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय से आए ब्रह्माकुमार भगवान भाई ने शनिवार को कहीं. वे सिमराही बाजार स्थित ब्रह्माकुमारीज राजयोग सेवा केंद्र के ओम शांति भवन में आयोजित कार्यक्रम में ‘आदर्श शिक्षक एवं समाज परिवर्तन में शिक्षकों की भूमिका’ विषय पर शिक्षकों को संबोधित कर रहे थे.
शिक्षक सिर्फ पाठ पढ़ाने वाले नहीं, चरित्र गढ़ने वाले भी
भगवान भाई ने कहा कि शिक्षक बच्चों को गढ़ने वाले मूर्तिकार हैं. यदि शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी बच्चे गलत दिशा में जा रहे हैं, तो शिक्षकों को अपने आचरण पर भी विचार करना चाहिए. विद्यार्थी शिक्षक के व्यवहार और संस्कारों का अनुकरण करते हैं. इसलिए शिक्षक के जीवन में सद्गुणों का आचरण होना जरूरी है.
उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में भौतिक स्तर पर काफी सुधार हुआ है, लेकिन नैतिक मूल्यों में गिरावट देखने को मिल रही है. ऐसे में बच्चों को नैतिक शिक्षा देना और उनके भीतर सकारात्मक सोच विकसित करना समय की जरूरत है.
कार्यक्रम के मुख्य बिंदु
- शिक्षकों को अपने आचरण से विद्यार्थियों को प्रेरणा देने का संदेश.
- नैतिक शिक्षा और सकारात्मक चिंतन पर जोर.
- शिक्षक को समाज परिवर्तन का माध्यम बताया गया.
- तनावमुक्त रहने और आध्यात्मिक ज्ञान अपनाने की अपील.
- आदर्श शिक्षकों और राजयोग शिक्षिकाओं का सम्मान.
- कार्यक्रम के अंत में कराया गया राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास.
सकारात्मक सोच से बदल सकता है समाज
भगवान भाई ने कहा कि बिगड़ती सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए समाज में सकारात्मक बदलाव की जरूरत है. सच्चा शिक्षक वही है, जो अपने जीवन की धारणाओं और आचरण से दूसरों को प्रेरित करे. सकारात्मक धारणाओं का असर व्यक्ति की वाणी, कर्म, व्यवहार और व्यक्तित्व पर दिखाई देता है.
उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज के शिल्पकार हैं और आदर्श शिक्षक ही आदर्श समाज का निर्माण कर सकता है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, “एक दीपक से पूरा कमरा प्रकाशमान हो जाता है, तो क्या हम सब मिलकर पूरे जिले को मूल्यनिष्ठ शिक्षा के प्रकाश से प्रकाशित नहीं कर सकते?”
उन्होंने शिक्षकों से सेवाभाव के साथ समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का आह्वान किया.
शिक्षकों को तनावमुक्त रहने की भी दी सलाह
स्थानीय ब्रह्माकुमारीज राजयोग सेवा केंद्र की प्रभारी राजयोग शिक्षिका बीके बबीता दीदी ने कहा कि समाज में बदलाव लाने की जिम्मेदारी शिक्षकों की है. इसके लिए शिक्षकों को अपने आचरण पर विशेष ध्यान देने के साथ आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने और तनावमुक्त रहने की जरूरत है.
5 हजार स्कूलों और 800 जेलों तक पहुंचा नैतिक शिक्षा का संदेश
सीनियर राजयोग शिक्षक बीके किशोर भाई ने बीके भगवान भाई का परिचय देते हुए बताया कि उन्होंने करीब 5,000 स्कूलों और 800 जेलों में नैतिक शिक्षा, सकारात्मक चिंतन और अपराधमुक्त जीवन का संदेश पहुंचाने का काम किया है. उनके इस कार्य का नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी दर्ज किया जा चुका है.
आदर्श शिक्षकों का हुआ सम्मान
कार्यक्रम के दौरान आदर्श शिक्षकों के साथ राजयोग शिक्षिका बीके बीना बहन और बीके आरती बहन का सम्मान किया गया. इस अवसर पर इंद्रदेव चौधरी, सत्य नारायण भाई, ललिता देवी, रामफल भाई, रवि भाई, सीता देवी, इंदु देवी, सावित्री देवी सहित अन्य लोग मौजूद रहे.
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों को राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास कराया गया.
