सुपौल जिले के अनुमंडलीय अस्पताल त्रिवेणीगंज में चिकित्सकों की भारी कमी के चलते स्थानीय स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं. क्षेत्र की विशाल आबादी और प्रतिदिन अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों के अनुपात में जहां कम से कम 26 डॉक्टरों की सख्त जरूरत है, वहीं वर्तमान में यह अस्पताल महज छह डॉक्टरों के भरोसे संचालित हो रहा है. नतीजतन, अस्पताल पहुंचने वाले गरीब और असहाय मरीजों को समय पर समुचित इलाज नहीं मिल पा रहा है और ड्यूटी पर तैनात गिने-चुने डॉक्टरों पर काम का भारी दबाव बना हुआ है.
4.15 लाख आबादी और आसपास के ग्रामीणों का एकमात्र सहारा
त्रिवेणीगंज अनुमंडल क्षेत्र की लगभग 4 लाख 15 हजार की बड़ी आबादी के साथ-साथ आसपास के ग्रामीण इलाकों के लोग प्राथमिक और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के लिए पूरी तरह इसी अनुमंडलीय अस्पताल पर निर्भर हैं.
अस्पताल में रोजाना सामान्य बीमारियों के अलावा प्रसव, सड़क दुर्घटना, मौसमी बुखार और विभिन्न गंभीर बीमारियों से पीड़ित सैकड़ों मरीज पहुंचते हैं. सीमित संसाधनों और मात्र 6 डॉक्टरों की मौजूदगी के कारण ओपीडी से लेकर इमरजेंसी वार्ड तक मरीजों की लंबी कतारें लग रही हैं, जिससे स्वास्थ्यकर्मियों को भी भारी मानसिक व शारीरिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है.
विशेषज्ञ चिकित्सकों का टोटा, रेफरल सेंटर बना अस्पताल
अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों (स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स) का न होना स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे बड़ी कमजोरी बनकर उभरा है. आवश्यक विशेषज्ञ नहीं होने के कारण दुर्घटना या गंभीर स्थिति में आने वाले मरीजों को प्राथमिक उपचार देकर तत्काल बाहर रेफर कर दिया जाता है. इससे मरीजों की जान जोखिम में पड़ती है और परिजनों को आर्थिक व मानसिक परेशानी उठानी पड़ती है.
अस्पताल को सुचारू रूप से चलाने के लिए कम से कम 5 प्रमुख विशेषज्ञ डॉक्टरों की तत्काल आवश्यकता है:
- शिशु रोग विशेषज्ञ (Pediatrician): नवजातों और बच्चों के गंभीर रोगों के इलाज के लिए.
- स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ (Gynecologist): सुरक्षित प्रसव और जटिल महिला रोगों की देखरेख के लिए.
- हड्डी रोग विशेषज्ञ (Orthopedic Surgeon): दुर्घटनाओं में घायल मरीजों की सर्जरी व त्वरित उपचार हेतु.
- औषधि विशेषज्ञ (Physician / MD Medicine): क्रोनिक और गंभीर आंतरिक बीमारियों के प्रबंधन के लिए.
- शल्य एवं मूर्छक विशेषज्ञ (Surgeon & Anesthetist): आपातकालीन ऑपरेशन और सिजेरियन डिलीवरी के संचालन हेतु.
स्वीकृत पदों पर अविलंब तैनाती की मांग
स्थानीय ग्रामीणों और बुद्धिजीवियों का कहना है कि अनुमंडल स्तर के अस्पताल का दर्जा मिलने के बावजूद आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध न कराना क्षेत्र की जनता के साथ घोर उपेक्षा है.
यदि अस्पताल में तय मानकों के अनुसार सभी 26 पदों पर डॉक्टरों और आवश्यक विशेषज्ञों की नियुक्ति कर दी जाए, तो जटिल से जटिल मामलों का इलाज स्थानीय स्तर पर ही संभव हो सकेगा. लोगों ने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि रिक्त पड़े सभी पदों पर नियमित डॉक्टरों की अविलंब बहाली की जाए, ताकि आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दर-दर न भटकना पड़े.
