Supaul News: तीन दिवसीय कबीर संतमत सत्संग का हुआ समापन

सज्जनों की संगति को ही सत्संग कहा जाता है, जहां मनुष्य को अच्छे विचार, सदाचार और ईश्वर भक्ति की प्रेरणा मिलती है.

प्रतापगंज, (सुपौल) से सरोज कुमार महतो की रिपोर्ट : प्रखंड अंतर्गत टेकुना पंचायत के वार्ड संख्या 8 में बासुदेव पादुका जी के दरवाजे पर आयोजित कबीर संतमत सत्संग का समापन मंगलवार को श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ हो गया. तीन दिवसीय इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर संतों के प्रवचन का लाभ उठाया. सत्संग में नेपाल से आए संत उमा साहेब, हसनपुर से उपेंद्र साहेब, रामचंद्र साहेब, सूरदास महानंद साहेब, गढ़िया से प्रभा साहेब तथा छातापुर से बैद्यनाथ साहेब ने अपने-अपने विचार रखे. संतों ने कबीर साहेब की वाणी और उनके सिद्धांतों पर प्रकाश डालते हुए लोगों को सत्य, भक्ति और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी.

सच्चे साधु से किसी व्यक्ति या पशु को कभी हानि नहीं होती : संत उमा साहेब

अपने संबोधन में संत उमा साहेब ने कहा कि सच्चे साधु से किसी व्यक्ति या पशु को कभी हानि नहीं होती. उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि लंका दुराचारियों की नगरी थी, लेकिन वहां भी विभीषण के घर के दरवाजे पर तुलसी का पौधा था और दीवारों पर भगवान श्रीराम का वर्णन अंकित था. इससे यह संदेश मिलता है कि बुरे वातावरण में भी सज्जनता और भक्ति जीवित रह सकती है. उन्होंने आगे कहा कि सज्जनों की संगति को ही सत्संग कहा जाता है, जहां मनुष्य को अच्छे विचार, सदाचार और ईश्वर भक्ति की प्रेरणा मिलती है.

भजन-कीर्तन से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा :

कार्यक्रम के दौरान भजन-कीर्तन से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा. समापन के अवसर पर श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण किया गया, एवं भंडारा का भी आयोजन किया गया. जिसमे सैकड़ो  भक्तगण प्रसाद ग्रहण किये. कार्यक्रम को लेकर स्थानीय लोगों में काफी उत्साह देखा गया और सभी ने ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन को समाज के लिए उपयोगी बताया.

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By Divyanshu Prashant

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