मस्जिद निर्माण को लेकर एक ही समुदाय के दो पक्षों में विवाद, निर्माण कार्य पर लगी रोक

ग्रामीणों ने एकजुट होकर पुराने स्थल पर हो रहे मस्जिद के नवनिर्माण पर एतराज जताते तत्काल निर्माण कार्य पर रोक लगा दिया

सुपौल. सदर प्रखंड के बलहा पंचायत स्थित नुनूपट्टी गांव में मस्जिद निर्माण स्थल को लेकर एक ही धर्म के दो पक्षों के बीच विवाद उत्पन्न हो गया है. मंगलवार को ग्रामीणों ने एकजुट होकर पुराने स्थल पर हो रहे मस्जिद के नवनिर्माण पर एतराज जताते तत्काल निर्माण कार्य पर रोक लगा दिया. आक्रोशित लोगों का आरोप था की बिना आम सहमति के संवेदक चंद लोगों को प्रलोभन देकर चुपचाप रातों रात जेसीबी मशीन लगाकर नींव लेने के लिए गड्ढा खोद लिया. इसकी सूचना जब लोगों को मिली तो एकजुट होकर विरोध जताने लगे. इसकी सूचना पाकर गांव पहुंचे सदर एसडीएम इन्द्रवीर कुमार ने दोनों पक्षों की बातें सुनी. और कहा कि इबादत की जगह किसी की व्यक्तिगत संपत्ति नहीं हो सकती है. वह पूरे समुदाय की संपत्ति है और समाज के लिए धरोहर है. उन्होंने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया की मस्जिद का निर्माण हर हाल में सभी ग्रामीणों के सहमति से होगा. ग्रामीण मो दीप, मो अलाउद्दीन, मो जुवेर, मो खुर्शीद, शमीम, मो अजहर, मो गब्बर, मो रिजाउल, मो राजा, मो कलम, मो लल्लू सहित अन्य ने कहा की हाईवे पर आवागमन शुरू होने के बाद जगह कम रहने के कारण मस्जिद के सामने पार्किंग का कोई विकल्प नहीं है. जबकि मस्जिद का गेट हाईवे का चौराहा है जिससे भविष्य मे गंभीर समस्या उत्पन्न होगी. ग्रामीणों ने की सात कट्ठा जमीन की व्यवस्था ग्रामीणों के अनुसार गांव के मध्य में संयुक्त प्रयास से लगभग सात कट्ठा जमीन की व्यवस्था मस्जिद निर्माण के लिए की गई है. यह जमीन सभी दृष्टिकोण से मस्जिद निर्माण के लिए उपयुक्त है. एसडीएम कुमार इंदवीर के निर्देश पर भूमि सुधार उप समाहर्ता अली एकराम ने नुनूपट्टी पहुंच कर ग्रामीणों से बातचीत किया. ग्रामीण ने कहा कि मस्जिद की नई जगह बीच बस्ती में रहने के कारण नमाजियों को मस्जिद आने जाने में सुविधा होगी. जगह पर्याप्त रहने के कारण बड़ा और भव्य मस्जिद का निर्माण हो सकेगा. पार्किंग की समस्या भी नही रहेगी. वही अगर भविष्य में हाइवे का विस्तार होता है तो मस्जिद का अस्तित्व भी बना रहेगा. कहते हैं डीसीएलआर भूमि सुधार उप समाहर्ता अली एकराम ने कहा कि ग्रामीणों की शिकायत पर तत्काल मस्जिद निर्माण के संवेदक को फोन कर बिना स्थानीय ग्रामीण की सहमति के कार्य नहीं करने का निर्देश दिया. जहां तक विवाद की बात है तो वहां कोई विवाद ही नहीं है.

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