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Bihar News: सुपौल में बर्ड फ्लू की पुष्टि, पक्षियों की किलिंग का कार्य तेज, प्रशासन व पशुपालन विभाग चौकस

सुपौल जिले में पक्षियों में फैलने वाली जानलेवा बीमारी बर्ड फ्लू ने दस्तक दे दी है. बर्ड फ्लू की पुष्टि होने के बाद प्रशासन व पशुपालन विभाग हरकत में आ गया है. वहीं संक्रमित पक्षियों को मारने का काम शुरू कर दिया गया है. ताकि बर्ड फ्लू का वायरस अन्य इलाकों में नहीं फैले.

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
सुपौल में बर्ड फ्लू की पुष्टि
सुपौल में बर्ड फ्लू की पुष्टि
प्रभात खबर

राकेश. बिहार के सुपौल जिले से बड़ी खबर सामने आ रही है. पक्षियों में फैलने वाली जानलेवा बीमारी बर्ड फ्लू ने सुपौल जिले में दस्तक दे दी है. सदर प्रखंड अंतर्गत पिपराखुर्द पंचायत के छपकाही गांव में बर्ड फ्लू का मामला उजागर हुआ है. बर्ड फ्लू की पुष्टि होने के बाद प्रशासन व पशुपालन विभाग हरकत में आ गया है. प्रभावित गांव छपकाही के 01 किमी के दायरे में आने वाले मुर्गे-मुर्गियों, बत्तखों एवं अन्य पक्षियों की जांच शुरू कर दी गयी है. वहीं संक्रमित पक्षियों को मारने का काम शुरू कर दिया गया है. ताकि बर्ड फ्लू का वायरस अन्य इलाकों में नहीं फैले. बर्ड फ्लू की जानकारी मिलने के बाद राज्यस्तरीय जांच टीम शुक्रवार को उक्त गांव पहुंची. जहां 09 किमी क्षेत्र के दायरे में रेंडमली जांच भी शुरू कर दी गयी है. इस वायरस के फैलने से इलाके में दहशत का माहौल है.

सैंपल की जांच से बीमारी की हुई पहचान

मालूम हो कि थाना क्षेत्र के छपकाही गांव में कुछ दिनों पहले अचानक कई कौओं और मुर्गियों की मौत होने लगी थी. घटना कि जानकारी स्थानीय लोगों ने पशुपालन विभाग को दिया था. जिसके बाद पशुपालन विभाग ने मामले की जांच की और उक्त गांव से कुछ पक्षियों के सैंपल लेकर कोलकत्ता एवं अन्य फॉरेन्सिक लैब भेजा था. जिसमें बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई. प्रभारी जिला पशुपालन पदाधिकारी रामशंकर झा ने बताया कि 02 सप्ताह पहले छपकाही गांव के वार्ड नंबर 01 से 11 तक में मुर्गे-मुर्गियों, बत्तख और कौओं की अचानक मौत होने की सूचना मिली थी. जिसके बाद पशुपालन विभाग की टीम ने गांव जाकर जांच किया और पटना से टीम बुलाकर उक्त गांव से कुछ संक्रमित पक्षियों का सैंपल लिया गया. जिसमें में बर्ड फ्लू का मामला सामने आया.

रैपिड रिस्पांश टीम गठित

पशुपालन विभाग के निदेशक के आदेश पर डीएम कौशल कुमार और एसपी डी अमरश ने संयुक्त निर्देश जारी कर रैपिड रिस्पांस टीम का गठन कर दिया है. इस टीम को संक्रमित पक्षियों को मारने का काम दिया गया है. वहीं बर्ड फ्लू के वायरस को फैलने से रोकने के लिए इलाके के 01 से 09 किमी तक के दायरे में सभी गांवों को चिन्हित कर जांच करने के लिए टीम बना दी गयी है. इसका मकसद समय रहते बर्ड फ्लू के वायरस को सीमित दायरे में रोकना है.

मारे जा चुके हैं 258 पक्षी

छपकाही गांव को केंद्र मानते हुए 01 किमी के दायरे में सभी गांवों के मुर्गे-मुर्गियों को मारने के लिए पशुपालन विभाग ने 04 टीम का गठन किया है. इस इलाके में अब तक 258 पक्षियों को किलिंग किया है और उसे भारत सरकार के मानक के अनुरूप गड्ढे खोद कर दफना दिया गया. साथ ही इस इलाके में लगातार फॉगिंग व सेनेटाइज भी किया जा रहा है. कहा कि जिसके भी पक्षियों का किलिंग किया गया है, उनको सरकारी दर पर मुआवजा भी दिया जायेगा. कहा कि एक किलोमीटर के इलाके में फिलहाल एक भी पोल्ट्री फार्म नही है. अन्य जगहों पर पॉल्ट्री फार्म को चिन्हित किया जा रहा है.

एहतियात बरतना जरूरी

जिला पशुपालन पदाधिकारी श्री झा ने बताया कि डोमेस्टिक पोल्ट्री फार्म के पक्षियों के संक्रमित होने के बाद इंसान के बीच इसके फैलने की संभावना बढ़ जाती है. पक्षियों के मल, लार, नाक-मुंह या आंख से स्राव के माध्यम से भी ये बीमारी इंसानों में फैल सकती है. दुकान से चिकन खरीदने के बाद उसे धोते वक्त हाथों पर ग्लव्स और मुंह पर मास्क जरूर पहनें. कच्चा मांस या अंडा भी किसी इंसान को संक्रमित कर सकता है. हालांकि विभाग द्वारा त्वरित कार्रवाई की जा रही है. लोगों को डरना नहीं चाहिये. बल्कि एहतियात बरतना जरूरी है.

लोगों में है दहशत

वर्ल्ड फ्लू बीमारी फैलने की जानकारी मिलने से लोगों में दहशत है. स्थानीय अजय पासवान, मुकेश पासवान, मो कालू, मो फरहान, मो अख्तर, मो कैला, अजय पासवान, रामबाबू पासवान, अमित पासवान, रामेश्वर पासवान, अशोक पासवान, मिथिलेश, मोहम्मद मूसा, मो आमना आदि ने बताया कि उनके घर से पशुपालन विभाग द्वारा पालतू पक्षी ले जाकर मार दिया गया है. लेकिन इस बीमारी के वृहद पैमाने पर फैलने का डर सता रहा है.

वायरस से फैलता है बर्ड फ्लू

सदर अस्पताल में पदस्थापित चिकित्सक डॉ दुर्गेश कुमार ने बताया कि यह बीमारी इन्फ्लूएंजा टाइप-ए एच 5एन वन वायरस की वजह से फैलता है. डब्लयूएचओ की एक रिपोर्ट की मानें तो एच 5 एन वन के कारण संक्रमित लोगों में मृत्यु दर लगभग 60 प्रतिशत है. यानी इस बीमारी का मॉर्टालिटी रेट कोरोना वायरस से भी ज्यादा है. इस वायरस के खतरे से बचने के लिए पक्षियों के साथ सीधे संपर्क में नहीं आना चाहिए.

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