मिलती धान की कीमत, तो बच जाती किसान प्रमोद की जान

प्रतापगंज : अभाव और उम्मीद के बीच जीना किसानों की नियति होती है. लेकिन अभाव से उम्मीद भी टूटती है और कभी-कभी सांसें भी. कुछ ऐसा ही वाकया प्रखंड के भवानी उत्तर पंचायत के गंगसायर गांव के वार्ड-13 में पांच दिन पूर्व हुआ. इलाज के अभाव में किसान प्रमोद यादव (35) ने दम तोड़ दिया. […]

प्रतापगंज : अभाव और उम्मीद के बीच जीना किसानों की नियति होती है. लेकिन अभाव से उम्मीद भी टूटती है और कभी-कभी सांसें भी. कुछ ऐसा ही वाकया प्रखंड के भवानी उत्तर पंचायत के गंगसायर गांव के वार्ड-13 में पांच दिन पूर्व हुआ.

इलाज के अभाव में किसान प्रमोद यादव (35) ने दम तोड़ दिया. दुखद यह है कि बीमार प्रमोद जब इलाज के लिए पाई-पाई का मोहताज था, उस वक्त भी उसकी किसानी उसके काम नहीं आयी. पैक्स को बेचे गये 10 क्विंटल धान की कीमत हाथ नहीं आयी और किसान की संघर्ष यात्रा पर विराम लगा गया. बहरहाल छह सदस्यीय परिवार अब पल-पल मरने को विवश है. महज दो बीघे जमीन का मालिक प्रमोद, खेती की बदौलत सात सदस्यीय परिवार का पेट पालता था.

इस बार अच्छी खासी धान की उपज मिली. बाजार की कीमत और सरकारी कीमत में बड़ा फर्क होने से पैक्स के हाथों ही धान बेचना मुनासिब समझा. साल भर के लिए खाने लायक धान रख शेष 10 क्विंटल धान को प्रमोद ने पैक्स को बेच दिया. प्रमोद की पत्नी पूनम देवी के अनुसार मार्च में पैक्स में 10 क्विंटल धान बेचा गया. इसी बीच प्रमोद बीमार हो गया. रिश्तेदारों की मदद से कुछ दिनों तक इलाज चलता रहा. लेकिन जब रिश्तेदारों ने हाथ खड़े कर दिये तो पत्नी के पास कोई विकल्प नहीं था. इस दौरान पैक्स से संपर्क भी साधा गया, लेकिन निराशा ही मिली.

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