विभागीय उदासीनता के कारण पर्चाधारी दर-दर भटकने को मजबूर
सत्तरकटैया : बिहार सरकार का ऑपरेशन भूमि दखल-दिहानी अभियान मजाक बनकर रह गया है. इस योजना के तहत बासगीत पर्चा प्राप्त गरीबों को जमीन पर दखल दिलाना है. लेकिन विभागीय उदासीनता के कारण पर्चाधारी दर-दर भटकने को मजबूर हो रहे हैं. भेलवा पंचायत के वार्ड नंबर सात में वर्ष 2001 में 24 महादलितों को पर्चा दिया गया था. लेकिन आज तक उक्त भूमि पर दखल कब्जा नहीं मिला है. पर्चाधारियों द्वारा कई बार दखल कब्जा दिलाने के लिए आवेदन भी दिया गया. लेकिन आज तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है. सरकार द्वारा महादलित परिवारों के बीच विवादित जमीनों को आवंटित कर दिया गया है.
जिसके कारण हाथ में पर्चा मिलाने के बावजूद भी आवंटित जमीन से बेदखल है. इस जमीन पर दबंगों का कब्जा बना हुआ है. मालूम हो कि माह सितंबर 2014 से राज्य भर में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा ऑपरेशन भूमि दखल दहानी के नाम से बेदखल पर्चाधारियों को उन्हें आवंटित भूमि पर दखल कब्ज़ा दिलाने के उदेश्य से एक महत्वाकांक्षी योजना चलायी जा रही है. इस अभियान में बेदखली पर्चाधरी को मापी करा कर तथा आपसी सहमति से भूमि पर दखल-कब्जा दिलाना है.
लेकिन मापी करने या आपसी सहमति से दखल नहीं मिल पाने की स्थिति में पुलिस प्रशासन की मदद से दखल दिलवाया जायेगा. लेकिन यदि भूमि विवादित हो तो बिहार भूमि विवाद निराकरण अधिनियम के अंतर्गत भूमि सुधार उप समाहर्ता के न्यायालय में वाद दायर कर मामलों को प्राथमिकता के आधार पर वाद का निष्पादन कर हर हाल में दखल दिलवाने की कार्रवाई सुनिश्चित किया जाना है. आपरेशन भूमि दखल दहानी शत प्रतिशत लक्ष्य की प्राप्ति के लिए जून से अगस्त तक का समय निर्धारित किया है.
इस तीन महीनों के अंदर अभियान के तौर पर पर्चाधारियों को जमीन पर कब्जा दिलाया जायेगा. पर्चाधारी वीरेंद्र राम, सहदेव राम, गजेंद्र राम, पुनीता देवी, वरुणा देवी, शांति देवी, गजेंद्र राम, शंकर राम ने सीओ को आवेदन दिया है.
