तटबंध के बीच स्थिति भयावह, मवेशियों के लिए नहीं है चारा
मरौना : कोसी नदी के बीच बसे प्रखंड के दर्जनों गांव के लोगों को खुद की ही नहीं बल्कि माल मवेशियों के चारे के भी लाले पर गये हैं. लिहाजा कोसी नदी के बढ़ते जलस्तर को लेकर लोग मवेशी चारा के लिये नाव के सहारे इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं. स्थानीय लोगों की मानें तो […]
मरौना : कोसी नदी के बीच बसे प्रखंड के दर्जनों गांव के लोगों को खुद की ही नहीं बल्कि माल मवेशियों के चारे के भी लाले पर गये हैं. लिहाजा कोसी नदी के बढ़ते जलस्तर को लेकर लोग मवेशी चारा के लिये नाव के सहारे इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं. स्थानीय लोगों की मानें तो सरकार द्वारा कोसी पीड़ित के लिए छोटे नाव का परिचालन आनन फानन में कर दिया गया है, जो पर्याप्त नहीं है. पीड़ितों को नाव के सहारे ही भोजन के साथ साथ मवेशी के चारा का जुगाड़ करना पड़ता है.
घर व दरवाजे पर पानी भर जाने से धान कुटाई व आटा पीसने वाली मशीन भी बंद है. लोगों को अपनी रोटी के जुगाड़ में अधिक दूरी नापने पर विवश होना पड़ रहा है. पीड़ितों ने प्रशासन से मांग की है कि कोसी नदी के इस विकराल स्वरूप के बीच इंजन लगे नाव की व्यवस्था करानी चाहिए. पाल वाली नाव से पीड़ितों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है.
लाेग कर रहे ऊंचे स्थानों पर पलायन
बाढ़ प्रभावित इलाकों में अब कोसी का तांडव बेजुबान मवेशियों पर भी जारी है. जिस कारण कई परिवार के लोग ऊंचे स्थान पर पलायन कर रहे हैं. मुखिया सुमित्रा देवी, सुरेश प्रसाद सिंह, शेख करीम, राजकुमार यादव, नीलम मेहता सहित अन्य ने जिला प्रशासन से पर्याप्त मात्रा में सरकारी नाव बहाल करने की मांग की है ताकि लोगों को जान माल की सुरक्षा एवं आवागमन में परेशानी ना हो. बहरहाल जो भी हो आज की तारीख में तटबंध के बीच बसे लोगों को हूक उठ रही है.