भक्तों ने किया भगवान शिव का भव्य शृंगार

सुपौल : सावन माह की चौथी सोमवारी की संध्या सदर प्रखंड के तिलेश्वर में शिव भक्तों ने महादेव का भव्य शृंगार किया. मौके पर सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया. पुजारियों ने वैदिक मंत्रों के उद्घोष से बाबा का शृंगार किया. जिससे मंदिर परिसर व आस-पास का माहौल पूरी तरह भक्तिमय नजर आ […]

सुपौल : सावन माह की चौथी सोमवारी की संध्या सदर प्रखंड के तिलेश्वर में शिव भक्तों ने महादेव का भव्य शृंगार किया. मौके पर सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया. पुजारियों ने वैदिक मंत्रों के उद्घोष से बाबा का शृंगार किया. जिससे मंदिर परिसर व आस-पास का माहौल पूरी तरह भक्तिमय नजर आ रहा था. लाल व केशरिया रंग के बीच मंदिर परिसर का नजारा बदला-बदला सा नजर आ रहा था. लोग बोलबम के जयकारे लगा रहे थे, तो वहीं महिलाएं समूह बनाकर भक्ति गीत गा रही थीं.

कुल मिलाकर सोमवार की शाम सदर प्रखंड समेत जिले के महत्वपूर्ण शिवालयों में माहौल पूरा भक्तिमय नजर आ रहा था. मौके पर कई शिवालयों में जागरण कार्यक्रम का आयोजन भी किया गया था. जहां बाबा के भक्तों ने देर रात तक भक्तिमय माहौल में हर-हर महादेव की भक्ति में लीन रहे. सुपौल जिला मुख्यालय में प्रखंड कार्यालय परिसर स्थित महादेव मंदिर में बाबा भोलेनाथ के भक्तों द्वारा जागरण का कार्यक्रम आयोजित किया गया था. जिसमें सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु झूमते नजर आये.

भगवान महादेव के शृंगार का है खास महत्व
सदर प्रखंड के बाबा तिल्हेश्वरनाथ न्याय परिषद के सचिव सह तंत्राचार्य अरुण कुमार मुन्ना ने श्रृंगार के महत्व पर प्रकाश डालते कहा कि पुराणों में परमात्मा के विभिन्न कल्याणकारी स्वरूपों में भगवान शिव को ही महा कल्याणकारी बताया गया है. जगत कल्याण व भक्तों के लिए वे धरती पर असंख्य बार विभिन्न स्वरूपों में अवतरित हुए हैं. जो मनुष्य ही नहीं देवताओं के लिए भी मुक्ति का मार्ग बने हैं. इसी भावना के कारण भोले भंडारी को त्रिदेवों में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है. 33 करोड़ देवी-देवताओं में निराकार शिव ही ऐसे हैं जिनकी लिंग के रूप में पूजा होती है. जिन्हें भक्त फक्कड़ बाबा के रूप में जानते हैं. जिनकी पूजा सभी देवी-देवताओं ने मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिए किया था. कहा जाता है कि कि सृष्टि की रचना ब्रह्मा जी ने की, विष्णु जी पालक और रक्षक का दायित्व निभाते हैं.
इसके चलते सृष्टि में जो असंतुलन पैदा होता है उसकी जिम्मेदारी भोले बाबा संभालते हैं. इसलिए उन्हें ‘संहारक’ के रूप में भी जाना जाता है. आचार्य कहते हैं कि शिव रूप, अनेकों प्रतीकों का योग है. उनके आस-पास जो वस्तुएं हैं, आभूषण हैं उनसे वह शक्ति ग्रहण करते हैं. शिव मंगल के प्रतीक हैं. शिव संस्कृति हैं. शाश्वत हैं, सनातन हैं. साकार व निराकार हैं. शिव जीवन व मोक्ष हैं.
कहा कि अगर शिव नहीं होते तो सृष्टि कैसी? शिव ना होते तो किसी की मृत्यु ना होती. कहा कि भांग, धतूरा जो सामान्य लोगों के लिए हानिकारक है वे उससे ऊर्जा ग्रहण करते हैं. यदि वह अपने कंठ में विष को धारण नहीं करते तो देवताओं को कभी अमृत नहीं मिलता. इस प्रकार देवताओं को अमरत्व प्रदान करने वाले शिव ही है. शास्त्रों में कहा गया है कि जब महादेव अपने रौद्र रूप में अवतरित होते हैं तब उनकी शक्ति पर नियंत्रण पाना सभी देवताओं के लिए कठिन हो जाता है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >