IAS Garima Lohia: कुछ सपने ऐसे होते हैं, जिन्हें पूरा करने की जिद सिर्फ अपनी जिंदगी बदलने के लिए नहीं होती… बल्कि किसी अपने की आखिरी इच्छा को जिंदा रखने के लिए होती है. बिहार की बेटी गरिमा लोहिया की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. कम उम्र में पिता को खोने के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी. पिता चाहते थे कि बेटी IAS बने.
गरिमा ने इस सपने को अपना लक्ष्य बनाया और आखिरकार देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक UPSC में इतिहास रच दिया. आज वही गरिमा लोहिया दरभंगा की नगर आयुक्त की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने के पीछे सिर्फ पढ़ाई और मेहनत नहीं, बल्कि एक परिवार का संघर्ष और एक बेटी का अटूट हौसला छिपा है.
2015 में सिर से उठा पिता का साया
बक्सर की रहने वाली गरिमा तीन भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर हैं. उनके पिता कारोबारी थे. साल 2015 में उनका निधन हो गया था. गरिमा के लिए यह जिंदगी का सबसे बड़ा झटका था. पिता के जाने के बाद परिवार की जिम्मेदारी मां के कंधों पर आ गई.
तीन बच्चों को संभालना और उनकी पढ़ाई जारी रखना आसान नहीं था. लेकिन मां ने हालात के आगे हार नहीं मानी. उन्होंने परिवार संभाला और बेटी के सपने को भी टूटने नहीं दिया. शायद यही वजह रही कि गरिमा ने पिता की कमी को अपनी कमजोरी बनने देने के बजाय उसे अपनी ताकत बना लिया.
बक्सर से दिल्ली और फिर UPSC तक
गरिमा ने दसवीं तक पढ़ाई बक्सर में की. इसके बाद पढ़ाई के लिए बनारस और फिर दिल्ली पहुंचीं. दिल्ली के किरोड़ीमल कॉलेज से ग्रेजुएशन किया. साल 2020 में कोरोना महामारी के दौरान उन्हें वापस बक्सर लौटना पड़ा. इसी दौरान उन्होंने घर से UPSC की तैयारी शुरू की. न कोई बड़ा कोचिंग कैंपस, न चमक-दमक वाला माहौल, बस किताबें, लक्ष्य और लगातार मेहनत. पहला प्रयास सफल नहीं हुआ, लेकिन गरिमा ने हार नहीं मानी.
दूसरे प्रयास में रचा इतिहास
दूसरे प्रयास में उनकी मेहनत रंग लाई. UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2022 में गरिमा लोहिया ने ऑल इंडिया रैंक-2 हासिल की. आज गरिमा 2023 बैच की IAS अधिकारी हैं और दरभंगा नगर आयुक्त के रूप में नई जिम्मेदारी संभाल रही हैं.
