संवाददाता, सीवान. आंदर नगर पंचायत में 15 वाटर एटीएम लगाने की योजना विवादों में घिरती नजर आ रही है. वाटर एटीएम में गड़बड़ी और सरकारी राशि के संभावित अपव्यय की शिकायत सामने आने के बाद जिलाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है. प्रथम दृष्टया अनियमितता की आशंका को गंभीर मानते हुए डीएम ने नगर पंचायत प्रशासन से सभी संबंधित कागजात तलब किए हैं. डीएम ने नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी को निर्देश दिया है कि वाटर एटीएम योजना से जुड़े सभी दस्तावेजों की सत्यापित प्रतियां उपलब्ध कराई जाएं ताकि मामले की गहराई से जांच की जा सके. कार्यपालक पदाधिकारी को मंगलवार की शाम तक पूरी फाइल और रिपोर्ट समर्पित करने का समय दिया गया है. बताया जा रहा है कि इस योजना पर करीब 95 लाख रुपये की राशि खर्च की जा रही है. आरोप है कि नगर पंचायत क्षेत्र में वाटर एटीएम लगाने के बजाय वाटर कूलर लगा दिए गए हैं. इसके अलावा योजना के तहत लगने वाले अन्य उपकरणों में भी भारी अनियमितता बरती गई है. डीएम से किए गये शिकायत में यह भी कहा गया है कि वाटर एटीएम, साइन बोर्ड और जिम अधिष्ठापन, सेक्शन मशीन की खरीद सहित अन्य सामानों की खरीद में नियमों की अनदेखी की गई है. डीएम ने केवल वाटर एटीएम योजना ही नहीं, बल्कि नगर पंचायत की जलकर वसूली को लेकर भी विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. डीएम ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि आंदर नगर पंचायत क्षेत्र में वाटर एटीएम अधिष्ठापन में 95 लाख रुपये के अपव्यय और वित्तीय अनियमितता की शिकायत प्राप्त हुई है. डीएम ने योजना की जांच का आदेश देते हुए 13 बिंदुओं पर आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा है. जांच शुरू होते ही नगर पंचायत में हड़कंप मच गया है डीएम ने नगर पंचायत आंदर से मांगी पूरी जानकारी- आंदर नगर पंचायत में वाटर एटीएम स्थापना को लेकर चल रही जांच के तहत डीएम ने नगर पंचायत के कार्यपालक अधिकारी से कई अहम जानकारियां मांगी हैं.डीएम ने स्पष्ट रूप से पूछा है कि वाटर एटीएम लगाने की आवश्यकता का आकलन आखिर किस आधार पर किया गया और इसके लिए कौन-सी प्रक्रिया अपनाई गई.डीएम ने यह भी जानकारी मांगी है कि नगर पंचायत क्षेत्र में कुल हाउस होल्डरों की संख्या कितनी है और वर्तमान में जलापूर्ति की अद्यतन स्थिति क्या है. इसके साथ ही अब तक जलापूर्ति से कितना शुल्क वसूला गया है, इसकी विस्तृत रिपोर्ट भी देने को कहा गया है. जांच के दौरान डीएम ने वाटर एटीएम के स्पेसिफिकेशन तय करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं.उन्होंने निर्देश दिया है कि स्पेसिफिकेशन निर्धारण से जुड़े सभी कागजात उपलब्ध कराए जाएं. इसके अलावा टेंडर और बीड से संबंधित पूरी जानकारी भी मांगी गई है. जिसमें यह स्पष्ट किया जाए कि टेंडर कागजात और बीड कागजात किस स्तर से अनुमोदित हुए. डीएम ने तकनीकी और वित्तीय बीड के निष्पादन से जुड़े सभी दस्तावेज, एलओआइ एग्रीमेंट, वर्क ऑर्डर और परफॉर्मेंस बैंक गारंटी की प्रतियां भी मांगी हैं.साथ ही यह भी पूछा गया है कि जलापूर्ति शुरू होने के बाद किसी तरह की जांच कराई गई या नहीं.यदि जांच हुई है तो उससे संबंधित सभी कागजात भी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है. टेस्टिंग–कमीशनिंग के कागजात भी तलब, जांच और सख्त हुई- टेस्टिंग और कमीशनिंग से जुड़े सभी कागजात भी तलब कर लिए हैं. डीएम ने पूछा है कि क्या वाटर एटीएम लगाने में बिहार अधिमान्य नीति का सही तरीके से पालन किया गया है या नहीं. डीएम ने यह भी जानकारी मांगी है कि यदि वाटर एटीएम की स्थापना की गई है तो उसके रखरखाव और मरम्मत की क्या रणनीति तय की गई है. साथ ही यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि एक साल में रखरखाव पर कितना खर्च आने का आकलन किया गया है. जांच के तहत सभी संचिकाओं और टिप्पणियों की सत्यापित प्रतियां, सशक्त स्थायी समिति और निर्वाचित बोर्ड की बैठकों की कार्यवाही की सत्यापित प्रति भी अपने हस्ताक्षर के साथ उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है. डीएम ने कहा है कि स्थापित वाटर एटीएम के जो जियो टैग फोटो उपलब्ध कराए गए हैं. उनसे यह प्रतीत होता है कि वाटर एटीएम की जगह सिर्फ वाटर कूलर लगाया गया है, जबकि निविदा वाटर एटीएम की थी. इसे गंभीर मामला मानते हुए डीएम ने साफ किया है कि 13 जनवरी को सभी बिंदुओं के आलोक में मांगे गए सभी कागजात हस्ताक्षरयुक्त और सत्यापित रूप में अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराए जाएं.
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