53 फीसदी छात्रों का ही बना अपार कार्ड

जिले के सरकारी व निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की अपार आइडी बनाने का प्रोसेस काफी धीमा है. दिसंबर की शुरुआत से ही बच्चों की अपार आईडी बनाने को लेकर अभियान जारी है. तमाम प्रयास के बावजूद अब तक जिले में महज 53.24 फीसदी बच्चों का ही अपार नंबर जेनरेट हो सका है.

प्रतिनिधि, सीवान. जिले के सरकारी व निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की अपार आइडी बनाने का प्रोसेस काफी धीमा है. दिसंबर की शुरुआत से ही बच्चों की अपार आईडी बनाने को लेकर अभियान जारी है. तमाम प्रयास के बावजूद अब तक जिले में महज 53.24 फीसदी बच्चों का ही अपार नंबर जेनरेट हो सका है. रिपोर्ट के अनुसार, जिले में पहली से 12वीं तक कुल 5 लाख 21 हजार 669 बच्चों का नामांकन है. अब तक इसमें दो लाख 77 हजार सात सौ 18 बच्चों का ही अपार कार्ड बन पाया है. निजी विद्यालयों में अपार कार्ड बनाने की रफ्तार काफी धीमी है. निजी संचालकों द्वारा करीब 25 फीसदी छात्रों का ही अपार कार्ड बना है. वही 229 विद्यालय ऐसे है जहां एक भी छात्रों का अपार कार्ड जेनरेट नहीं हुआ है. इन 229 स्कूलों में छात्रों की कुल संख्या के 7.21 फीसदी नामांकित छात्र हैं. अपार कार्ड बनाने की रफ्तार में तेजी लाने के लिए स्टेट प्रोजेक्ट डायरेक्टर अजय यादव ने डीइओ को निर्देश दिया है. निर्देश के मुताबिक एक से बारहवीं कक्षा तक के सभी नामांकित छात्रों का अपार कार्ड 15 अप्रैल तक बना लेना है. इसके लिए प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने 10 व 11 अप्रैल को विशेष अभियान चलाने का निर्देश डीइओ को दिया है. बच्चों की डेटा में भिन्नता के चलते नही बन रहा अपार कार्ड विद्यालयों में अपार कार्ड का फरमान शिक्षकों व अभिभावकों के लिए मुसीबत का कारण बन गया है.डेटा में भिन्नता होने के चलते छात्रों का कार्ड जेनरेट नही हो रहा है. जबकि विभाग के वरीय अधिकारियों द्वारा शिक्षकों को दंडित किया जा रहा है. वही छात्रों के परिजन इस मामले में अनभिज्ञ है. विभाग का कहना है कि एक राष्ट्र एक पहचान दिलाने के लिए यह योजना चलाई जा रही है. शिक्षकों का कहना है कि यूडायस पोर्टल पर जो डेटा है, उसका मेल छात्रों के आधार कार्ड से नहीं खाता है. मसलन जन्म तिथि व नाम में भिन्नता है. अधिकांश छात्र ऐसे है जिनके पास आधार कार्ड नहीं है. 30 फीसदी ऐसे छात्र है, जिनका जन्म प्रमाण पत्र नहीं बना है. जिससे उनका आधार कार्ड नहीं बन पा रहा है. वहीं कुछ छात्र ऐसे हैं, जिनका डेटा यू डायस पोर्टल पर नहीं है. इन परेशानियों के चलते अपार कार्ड जेनरेट नही हो रहा है. क्या कहते है जिम्मेवार अपार आइडी कार्ड से छात्रों को अपने शैक्षणिक रिकॉर्ड को ट्रैक करने और डिजिटल रूप में सुरक्षित रखने की सुविधा मिलेगी. यह कार्ड छात्रों के लिए आजीवन एक पहचान संख्या के रूप में कार्य करेगा. जिससे उनका शैक्षणिक डेटा हमेशा संगठित रहेगा. शिक्षक छात्रों व अभिभावकों अपार कार्ड के फायदे के बारे में बतायें. . राघवेंद्र प्रताप सिंह, डीइओ

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