दहा नदी के संरक्षण को लेकर प्रशासन सख्त

दहा नदी के संरक्षण, स्वच्छता और जल गुणवत्ता में सुधार को लेकर जिला प्रशासन ने व्यापक कार्ययोजना तैयार की है. जिलाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय के निर्देश पर दहा नदी में प्रदूषण नियंत्रण, जल प्रवाह सुधार तथा तटीय पर्यावरण संरक्षण के लिए विभिन्न स्तरों पर कार्रवाई शुरू की जाएगी. प्रशासन ने कहा है कि दहा नदी को प्रदूषणमुक्त एवं स्वच्छ बनाए रखने के लिए सभी संबंधित विभाग समन्वित रूप से कार्य करेंगे.

प्रतिनिधि, सीवान. दहा नदी के संरक्षण, स्वच्छता और जल गुणवत्ता में सुधार को लेकर जिला प्रशासन ने व्यापक कार्ययोजना तैयार की है. जिलाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय के निर्देश पर दहा नदी में प्रदूषण नियंत्रण, जल प्रवाह सुधार तथा तटीय पर्यावरण संरक्षण के लिए विभिन्न स्तरों पर कार्रवाई शुरू की जाएगी. प्रशासन ने कहा है कि दहा नदी को प्रदूषणमुक्त एवं स्वच्छ बनाए रखने के लिए सभी संबंधित विभाग समन्वित रूप से कार्य करेंगे. योजना के तहत दहा नदी के जल नमूने एकत्र कर उसकी गुणवत्ता की नियमित जांच कराई जाएगी. जल परीक्षण के दौरान बीओडी, सीओडी, डीओ, पीएच तथा टोटल कोलीफॉर्म जैसे मानकों की जांच होगी ताकि यह आकलन किया जा सके कि नदी का जल किस स्तर तक प्रदूषित है. इसके आधार पर प्रदूषण के स्रोतों की पहचान कर सुधारात्मक एवं नियंत्रणात्मक कार्रवाई की जाएगी. दहा नदी में बढ़ते गाद व जमाव के कारण कई स्थानों पर जल प्रवाह बाधित हो रहा है. इसे देखते हुए प्रशासन ने नदी की धारा को सुचारु बनाने के लिए री-सेक्शनिंग कार्य कराने का निर्णय लिया है. साथ ही नगर क्षेत्र से निकलने वाले नालों के अपशिष्ट जल को उपचारित कर ही नदी में प्रवाहित करने की व्यवस्था विकसित की जाएगी, ताकि बिना उपचार का गंदा पानी सीधे नदी में न पहुंचे. प्रशासन ने नदी में कचरा एवं ठोस अपशिष्ट फेंकने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है. यदि कोई व्यक्ति या संस्था नदी में कूड़ा-कचरा डालते हुए पाया जाती है तो उसके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी. दहा नदी स्थित पुल के दोनों ओर से नदी में गिरने वाले ठोस अपशिष्ट को रोकने के लिए जाली लगाई जाएगी. जिससे कचरा सीधे नदी में नहीं जा सकेगा. इसके अतिरिक्त नगर क्षेत्र की सभी नालियों के निकास बिंदुओं पर भी जाली लगाने की योजना है, ताकि प्लास्टिक, कूड़ा और अन्य ठोस अपशिष्ट नदी तक पहुंचने से पहले ही रोके जा सकें. नदी की सतह की नियमित सफाई कर जलमग्न अपशिष्ट पदार्थों को हटाने का कार्य भी लगातार किया जाएगा. दहा नदी के तटीय क्षेत्रों में हरित आवरण बढ़ाने के लिए गियोंवाकी पद्धति से सघन पौधरोपण कराया जाएगा. प्रशासन का मानना है कि इससे नदी तटों की पारिस्थितिकी मजबूत होगी और कटाव की समस्या में भी कमी आएगी. साथ ही नदी किनारे खेती करने वाले किसानों को रासायनिक उर्वरकों के सीमित उपयोग तथा जैविक खेती अपनाने के लिए जागरूक किया जाएगा. इसके लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं जनजागरूकता अभियान चलाए जाएंगे. जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि दहा नदी जिले की महत्वपूर्ण प्राकृतिक धरोहर है, जिसके संरक्षण में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. प्रशासनिक स्तर पर तय की गई कार्ययोजना के क्रियान्वयन से आने वाले समय में दहा नदी को स्वच्छ, अविरल और प्रदूषणमुक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की उम्मीद है.

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By Deepak Mishra

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