मनीष गिरि, सीवान : वैश्विक स्तर पर गहराते जल संकट के बीच जिला स्तर पर भी चिंता की लकीरें खींच दी है. हालात यह है कि तीन वर्ष में जल स्तर में तकरीबन 142.5 सेंटीमीटर की गिरावट आयी है. कई स्थानों पर जहां कुआं सुख गया है, वहीं चापाकल से भी पानी निकालने में लोगों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है.
विभाग की बातों पर गौर करें तो 2016 में जहां जिले का औसत भू-जल स्तर 12 फुट था, वह अब बढ़कर 16.9 फुट हो गया है. एक माह पूर्व यह 15.8 फुट के करीब था. इसके पीछे भौगोलिक स्थिति में हो रहे परिवर्तन के बीच बारिश का नहीं होना बताया जा रहा है, जो भू-जल स्तर सामान्य रखने में सहायक होती है.
लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार सीवान जिले को डी-केटेगरी में रखा गया है. ए-केटेगरी में उस जिले को शामिल किया गया, जहां का भू-जल स्तर 40 से 50 फुट नीचे है. सीवान का भू-जल स्तर अभी 30 फुट के करीब है. 25 फुट से नीचे जल स्तर गिरने पर साधारण चापाकल से पानी निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है.
गर्मी के मौसम में यह स्थिति और भयावह हो जाती है
भू-जल स्तर बढ़ाने के लिए जल का संचय जरूरी है. बारिश के जल को संचय करने के लिए पोखरे व तालाब का जीर्णोद्धार के साथ अच्छी बारिश भी होना जरूरी है. तीन चार वर्ष से सुखाड़ जैसी स्थिति उत्पन्न होने से हालात को और भयावह बना दिया है. सबसे अधिक पानी की बर्बादी खेती में होता है. वैज्ञानिक विधि से सिंचाई किया जाये तो पानी को बचाने में काफी सहूलियत होगी.
लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के कार्यपालक अभियंता इ अनिल कुमार अखिलेश की मानें तो जिले वासियों को अभी चिंतित होने की जरूरत नहीं है. उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि हालात यहीं रहे तो कुछ वर्षों में लोगों को जल स्तर के संकट का सामना करना पड़ेगा.
रेलवे स्टेशन पर बर्बाद होता पानी.
सीवान रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर एक का यह नजारा है. इस स्टेशन से कई महकमे के अधिकारी प्रतिदिन गुजरते है. परंतु किसी का ध्यान बर्बाद हो रहे पानी पर नहीं जाता है. यहां अक्सर नल का टोटी खराब होने पर बर्बाद होते पानी को आसानी से देखा जा सकता है.
