राष्ट्रीय कवि संगम के संस्थापक जगदीश मित्तल को दी गई श्रद्धांजलि

सीतामढ़ी में राष्ट्रीय कवि संगम के संस्थापक जगदीश मित्तल के निधन पर शोक सभा आयोजित की गई। कवियों ने उन्हें याद कर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

राष्ट्रीय कवि संगम: राष्ट्रीय कवि संगम के तत्वावधान में मंगलवार को बिहार पेंशनर समाज भवन में भव्य कवि गोष्ठी सह शोक सभा का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता राम एकबाल साह ने की, जबकि मंच संचालन वरिष्ठ कवि बच्चा प्रसाद विह्वल ने किया. कार्यक्रम के दौरान साहित्यकारों ने काव्य पाठ के जरिए सामाजिक संदेश दिया और संगठन के संस्थापक को श्रद्धासुमन अर्पित किए.

काव्य गोष्ठी में रचनाकारों ने अपनी कविताओं से मोहा मन

गोष्ठी के प्रथम सत्र में स्थानीय कवियों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं की प्रस्तुति दी, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा:

  • सामाजिक सद्भाव की कविता: कवि रामबाबू सिंह ने अपनी चर्चित कविता "पालो नहीं किसी से बैर" का सस्वर पाठ कर खूब वाहवाही बटोरी.
  • वरिष्ठ कवियों का पाठ: राम किशोर चकवा, सुरेश कुमार वर्मा, बच्चा प्रसाद विह्वल और अध्यक्ष राम एकबाल साह ने अपनी भावपूर्ण कविताओं से उपस्थित साहित्य प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया.

संस्थापक बाबूजी को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में राष्ट्रीय कवि संगम के संस्थापक राष्ट्रीय अध्यक्ष स्व. जगदीश मित्तल उर्फ 'बाबूजी' को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई. वक्ताओं ने उनके साहित्यिक योगदान को याद करते हुए कहा:

  • चुंबकीय व्यक्तित्व: बाबूजी के व्यक्तित्व में अद्भुत आकर्षण था, जिनके एक आह्वान पर सैकड़ों कवि एकत्र हो जाते थे.
  • मौन रखकर प्रार्थना: सभा के अंत में उपस्थित सभी कवियों और बुद्धिजीवियों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की.

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लेखक के बारे में

By राकेश कुमार राज

राकेश पिछले 23 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. वे प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों का व्यापक अनुभव रखते हैं. राकेश क्राइम रिपोर्टिंग के अलावा सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने के लिए जाने जाते हैं. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति और दिलचस्प किस्से-कहानियों में उनकी विशेष रुचि है.

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