Sitamarhi News: सीतामढ़ी का हलेश्वर स्थान रामायण काल से जुड़ी आस्था और चमत्कारों का प्रमुख केंद्र

Sitamarhi News: सीतामढ़ी का हलेश्वर स्थान रामायण काल से जुड़ा प्राचीन शिव मंदिर है. मान्यता है कि यहां राजा जनक ने शिवलिंग स्थापित किया था. श्रावण और महाशिवरात्रि में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं...

Sitamarhi News: सीतामढ़ी जिले के फतेहपुर गिरमिसानी में स्थित हलेश्वर स्थान श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है. यह प्राचीन शिव मंदिर अपनी धार्मिक मान्यताओं और रामायण काल से जुड़े इतिहास के कारण देशभर में प्रसिद्ध है. हर साल यहां हजारों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं.

राजा जनक ने कराया था हलेष्ठि यज्ञ

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मिथिला नरेश राजा जनक ने संतान प्राप्ति की कामना से यहां हलेष्ठि यज्ञ कराया था. इसी दौरान उन्होंने स्वयं शिवलिंग की स्थापना की थी. कहा जाता है कि भगवान राम और माता सीता ने भी इस स्थान पर पूजा-अर्चना की थी.

रामेश्वरम से भी प्राचीन मानी जाती है मान्यता

स्थानीय लोगों और जानकारों के अनुसार हलेश्वर स्थान की मान्यता काफी प्राचीन है. इसे रामेश्वरम से भी पुराना शिवधाम माना जाता है. वर्तमान मंदिर का निर्माण 17वीं शताब्दी में हुआ था, लेकिन 1942 के भूकंप में मंदिर को नुकसान पहुंचा था. बाद में तत्कालीन जिला प्रशासन ने इसका पुनर्निर्माण कराया.

धार्मिक आयोजनों से गुलजार रहता है परिसर

सीतामढ़ी शहर से कुछ किलोमीटर दूर स्थित यह मंदिर पारंपरिक स्थापत्य शैली में बना है. मंदिर परिसर में समय-समय पर भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिससे यहां का माहौल भक्तिमय बना रहता है.

श्रावण और महाशिवरात्रि में उमड़ती है भीड़

श्रावण मास और महाशिवरात्रि के दौरान यहां विशाल मेले का आयोजन होता है. दूर-दूर से श्रद्धालु जलाभिषेक करने पहुंचते हैं. ऐसी मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मन्नतें पूरी होती हैं, खासकर संतान प्राप्ति और विवाह से जुड़ी इच्छाएं.

मुजफ्फरपुर से अनिकेत गुप्ता की रिपोर्ट

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By SUMIT KUMAR

SUMIT KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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