Sitamadhi News: बेलसंड. बिहार सरकार भले ही ‘मिशन दक्ष’ और करोड़ों के बजट से शिक्षा सुधार के दावे कर रही हो, लेकिन बेलसंड प्रखंड के मध्य विद्यालय मांची कन्या की हकीकत डराने वाली है. यहाँ दो अलग-अलग स्कूलों का संचालन महज दो कमरों में हो रहा है. विद्यालय का पुराना भवन खंडहर बन चुका है, जिससे आए दिन मलबा गिरता रहता है. मासूम बच्चों के सिर पर हर वक्त खतरे की तलवार लटकी रहती है, लेकिन प्रशासन किसी बड़े हादसे के इंतजार में सो रहा है.
टैगिंग के खेल में पिस रहे 150 बच्चे
सरकार का निर्देश था कि भवनहीन विद्यालयों को निकटतम स्कूल में मर्ज किया जाए, लेकिन यहाँ टैगिंग का खेल चल रहा है. मध्य विद्यालय मांची कन्या में 80 बच्चे हैं, जिनके लिए एक कमरा है. वहीं, प्राथमिक विद्यालय मांची ब्रह्मस्थान के 70 बच्चों को भी इसी परिसर के एक कमरे में शिफ्ट कर दिया गया है. 150 से अधिक बच्चे और शिक्षक भीषण गर्मी और उमस के बीच दो छोटे कमरों में बैठने को मजबूर हैं.
बुनियादी सुविधाओं का अभाव और प्रशासनिक लापरवाही
स्कूल में न तो शौचालय की व्यवस्था है और न ही स्वच्छ पेयजल की. मिड-डे मील का अनाज रखने के लिए भी सुरक्षित जगह नहीं है. हद तो यह है कि मांची कन्या की प्रधानाध्यापिका सितंबर 2025 से गायब हैं. वर्तमान में शिक्षिका मीरा कुमारी मिड-डे मील देख रही हैं, लेकिन वित्तीय अधिकार न होने से राशन की खरीद एक बड़ी चुनौती बन गई है. फिलहाल मीरा कुमारी, सरिता कुमारी और अन्य शिक्षक शून्य संसाधनों के बीच बच्चों का भविष्य संवारने में जुटे हैं.
क्या कहते हैं अधिकारी
जब इस अव्यवस्था पर प्रभारी शिक्षा पदाधिकारी रामजी प्रसाद से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि मामला जिलाधिकारी रिची पांडेय के संज्ञान में है और भवन निर्माण का प्रस्ताव विभाग को भेजा गया है. सवाल यह है कि अगर स्वीकृति मिलने से पहले कोई हादसा हुआ, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
सीतामढ़ी के बेलसंड से तुषिम कुमार सोलंकी की रिपोर्ट
