सीतामढ़ी. राज्य अपीलीय प्राधिकार ने एक पंचायत के नौ शिक्षकों का नियोजन रद्द करने का आदेश दिया है. इन सबों का अवैध नियोजन पंचायत सचिव द्वारा किया गया था. उक्त पंचायत सचिव दिवंगत हो चुके है. इस प्रकरण में जिला अपीलीय प्राधिकार से उक्त शिक्षकों को राहत मिली थी, जिसके खिलाफ डीईओ व डीपीओ, स्थापना राज्य अपीलीय प्राधिकार के यहां अपील में गए थे. इस प्राधिकार ने सभी पक्षों की बातें सुनने के बाद तथ्यों के आधार पर अवैध नियोजित शिक्षकों का नियोजन रद्द करने का फैसला सुनाया है.
बभनगामा रामनगर पंचायत का मामला
अपील याचिका डीईओ द्वारा कहा गया था कि सुप्पी प्रखंड की बभनगामा रामनगर पंचायत में 2008 में अनारक्षित श्रेणी में केवल एक रिक्ति थी. वर्ष 2010 तक कोई नियुक्ति नहीं की गई. ये अभ्यर्थी न तो किसी स्कूल में योगदान नहीं दिए और न ही कोई काम किए थे. पंचायत नियोजन इकाई विभाग के द्वारा उपलब्ध कराई गई रिक्ति के आधार पर ही नियुक्ति कर सकती है. उक्त पंचायत में एक पद के विरुद्ध नौ अभ्यर्थियों की नियुक्ति दावा अवैध है. वहीं, ऐसा प्रावधान ही नहीं है कि नियोजन इकाई योगदान के बाद शिक्षकों को प्रमाण-पत्रों के सत्यापन के नाम पर काम करने से रोक दें और 10 साल के लंबे अंतराल के बाद बहाल कर दें. इन सबों को पंचायत सचिव द्वारा 13 मार्च 11 को ही पद से हटा दिया गया था. सुनवाई के क्रम में यह सामने आया था कि पंचायत सचिव ने संबंधित प्रधान शिक्षकों को लिखा था कि इन पंचायत शिक्षकों का नियोजन किया गया है. प्रमाणपत्रों को सत्यापन के लिए बोर्ड को भेजा गया है. सत्यापन अबतक नहीं हुआ है. इसके चलते इन शिक्षकों को हाजिरी बनाने से रोक दिया गया था.
नियोजन अवैध व फर्जी : बीईओ
अपील में कहा गया था कि 10 वर्षों के बाद 2021 में बहाल किया गया. बीईओ ने संबंधित प्रधानाध्यापकों को इन सबों का नियोजन स्वीकार न करने का निर्देश दिया था, क्योंकि नियुक्ति अवैध व फर्जी थी. बाद के दिनों में डीपीओ, स्थापना के आदेश पर सुप्पी बीईओ ने अवैध नियोजन की लेकर पंचायत सचिव के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई थी. सुनवाई में अभ्यर्थियों के वकील ने बिलंब से अपील दायर करने के आधार पर इसे खारिज करने की मांग की थी. साथ ही कहा था कि अभ्यर्थियों की दिसंबर 2010 में नियुक्ति पत्र दिया गया था. पंचायत सचिव ने भी अपना लिखित पक्ष रखा था. कहा था कि उन्हें शिक्षक नियोजन के किसी भी अभिलेख का प्रभार नहीं मिला है. अभिलेखों का प्रभार संभालने वाले पंचायत सचिव का निधन 2022 में हो गया है.बिना किसी रिक्ति के नियुक्ति अवैध
अपीलीय प्राधिकार की टिप्पणी व आदेश प्राधिकार के अध्यक्ष अशोक कुमार सिन्हा ने फैसले में कहा है कि बिना किसी रिक्ति के नियुक्ति अवैध थी. जिला अपीलीय प्राधिकार के आदेश को खारिज करते हुए इन शिक्षकों को एक पखवाड़े के अंदर सेवा से हटाने का आदेश पारित किया गया है. प्रभावित हुए शिक्षकों में क्रमशः डुमरा के शशि भूषण प्रसाद के पुत्र अभिषेक कुमार, राजोपट्टी के सुकन प्रसाद के पुत्र राजू कुमार, तलखापुर, डुमरा के राम प्रमोद राय के पुत्र उपेन्द्र कुमार, रामनगरा के जगरनाथ प्रसाद के पुत्र संजय प्रसाद, चंदौली के कौशलेंद्र कुमार सिंह के पुत्र रणधीर कुमार, कोइली, नानपुर के अरविंद कुमार सिंह के पुत्र आयुष प्रियदर्शी, मोतिहारी के सुमित सागर, बथनाहा के नवल किशोर सिंह के पुत्र मणि प्रभा व गिसारा के नथुनी सिंह के पुत्र सुरेंद्र सिंह शामिल हैं.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
