Sitamarhi Weather News: सीतामढ़ी, जो हर साल बागमती, अधवारा और लखनदेई नदियों की बाढ़ और अच्छी बारिश के लिए जाना जाता है, इस बार मानसून की बेरुखी झेल रहा है. जून से जुलाई के बीच सामान्य से करीब 42 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज होने के कारण जिले में सुखाड़ जैसे हालात बनने लगे हैं. इसका सबसे बड़ा असर धान की खेती पर दिखाई दे रहा है.
धान की रोपनी प्रभावित, महंगी सिंचाई का सहारा
बारिश नहीं होने से समय पर धान की रोपनी नहीं हो सकी. जिन किसानों ने किसी तरह रोपाई पूरी कर ली है, वे अब फसल बचाने के लिए बोरिंग और मोटर पंप से लगातार सिंचाई कर रहे हैं. इससे खेती की लागत काफी बढ़ गई है.
इन इलाकों में सबसे ज्यादा परेशानी
कम बारिश का सबसे अधिक असर बथनाहा, परिहार, सोनबरसा, सुरसंड और आसपास के क्षेत्रों में देखा जा रहा है. लगातार भू-जल दोहन के कारण कई जगहों पर जलस्तर नीचे चला गया है.
स्थिति यह है कि कई चापाकल कम पानी दे रहे हैं, जबकि कई घरेलू मोटर भी पानी नहीं खींच पा रहे हैं.
किसानों ने जताई चिंता
किसान अमरेंद्र सिंह, रमेश मिश्र, बैजु महतो, रामएकवाल महतो और अशर्फी साह का कहना है कि यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो धान की फसल बचाना मुश्किल हो जाएगा.
2009 और 2014 जैसे हालात की आशंका
स्थानीय किसानों और कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इससे पहले 2009 और 2014 में भी मानसून के शुरुआती दौर में 40 से 45 प्रतिशत तक वर्षा की कमी दर्ज हुई थी. उस समय सरकार को डीजल अनुदान और सुखाड़ राहत जैसी योजनाएं लागू करनी पड़ी थीं.
अगस्त के पहले सप्ताह में बारिश की उम्मीद
जिला कृषि विज्ञान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. राम ईश्वर प्रसाद ने बताया कि मौसम विभाग ने अगस्त के पहले सप्ताह में अच्छी बारिश का पूर्वानुमान जताया है.
उन्होंने बताया कि इस दौरान अधिकतम तापमान 31 से 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 27 से 28 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है.
येलो अलर्ट भी जारी
नेपाल के तराई क्षेत्र में सक्रिय मानसून को देखते हुए सीतामढ़ी के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है. यदि पूर्वानुमान के अनुसार अच्छी बारिश होती है तो धान की फसल को राहत मिल सकती है. वहीं, बारिश नहीं होने की स्थिति में जिले को एक बार फिर 2009 और 2014 जैसे कृषि संकट का सामना करना पड़ सकता है.
