कानू समाज मानजनी: कानू कल्याण महासभा, सीतामढ़ी के तत्वावधान में बरियारपुर गोट में कानू समाज के विभिन्न गांवों के मानजनों की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक बैठक आयोजित की गई. बैठक में वर्षों से चले आ रहे आपसी मनमुटाव, तल्खी और मतभेदों को हमेशा के लिए समाप्त करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया. समाज के प्रबुद्ध जनों ने सामूहिक एकता, सामाजिक समरसता और भाईचारे की नई मिसाल कायम करते हुए एक साथ आगे बढ़ने का संकल्प दोहराया.
बरियारपुर और भलहा-भलही के विवाद से प्रभावित थे कई गांव
बैठक में उपस्थित प्रतिनिधियों ने स्थिति की गंभीरता को साझा करते हुए बताया कि मतभेद के कारण सामाजिक ताना-बाना बुरी तरह बिखर रहा था:
- परंपरागत प्रथा पर लगी थी रोक: बरियारपुर तथा भलहा-भलही के मानजनों के बीच लंबे अरसे से चल रहे विवाद के कारण आसपास के कई गांवों के सामाजिक संबंध प्रभावित थे.
- बंद हो गया था 'ढेरी भोज': इस आपसी तनाव की वजह से समाज की सदियों पुरानी गौरवशाली मानजनी प्रथा यानी 'ढेरी भोज' का आयोजन भी पूरी तरह बंद पड़ा हुआ था.
आपसी संवाद से सुलझा विवाद, मानजनी प्रथा होगी पुनर्जीवित
बैठक के दौरान सभी पक्षों ने परिपक्वता दिखाते हुए सकारात्मक संवाद का रास्ता चुना. सबने खुले दिल से पुरानी कड़वाहट को भुला दिया और मानजनी प्रथा को पुनः पूरी गरिमा के साथ शुरू करने पर पूर्ण सहमति जताई. इस सुलह-समझौते को कराने और विभिन्न पक्षों के बीच सफल समन्वय स्थापित करने में पूर्व सैनिक अनिल कुमार की भूमिका बेहद सराहनीय रही. सभी सदस्यों ने सुख-दुख में कंधे से कंधा मिलाकर चलने का संकल्प लिया.
बैठक में समाज के गणमान्य लोग रहे उपस्थित
इस ऐतिहासिक सामाजिक पहल में समाज के कई गणमान्य लोगों ने भागीदारी निभाई:
- दशरथ साह, कपिल साह, राजदेव साह और सीताराम साह
- ललन साह, रामबाबू साह, जय मंगल साह और मानधारी साह
- राजाराम साह, रामचन्द्र साह, शिवजी साह और शंकर साह
उपस्थित सभी प्रतिनिधियों ने विश्वास जताया कि इस फैसले से पूरे जिले के कानू समाज में एकजुटता की एक नई लहर दौड़ेगी.
