सीतामढ़ी/सुप्पी. शिक्षा विभाग मौन है तथा सुप्पी थाने की पुलिस जांच के बाद ही प्राथमिकी दर्ज करने पर अड़ी है. जिले के सुप्पी प्रखंड के मनियारी खरहिया टोला स्थित प्राथमिक विद्यालय के वर्ग कक्ष का प्लास्टर गिरने की घटना के तीसरे दिन भी बच्चे स्कूल नहीं पहुंचे. 17 फरवरी की घटना से बच्चे बुरी तरह डरे व सहमे हैं. यही कुछ हाल शिक्षकों का भी है. शिक्षक भी वर्ग कक्ष में प्रवेश करने से कतरा रहे हैं, उन्हें भी अपनी जान का खतरा है. विभागीय अधिकारी भी जांच को लेकर कुछ बता नहीं पा रहे हैं, जबकि घटना के बाद ही जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीइओ) प्रमोद कुमार साहू ने बीइओ को प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था. उधर, घटना के तीन दिन बाद भी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीइओ) सरिता कुमारी व प्रधानाध्यापक मुकेश कुमार झा द्वारा प्राथमिकी दर्ज करने को लेकर दिये गये आवेदन के आलोक में थानाध्यक्ष के द्वारा अबतक प्राथमिकी दर्ज नहीं की जा सकी है. थानाध्यक्ष विष्णुदेव कुमार की दलील है कि इस मामले की वरीय अधिकारी के स्तर पर जांच होगी, उसके बाद ही कोई प्राथमिकी दर्ज होगी. गौरतलब है कि इस घटना में छत का प्लास्टर गिरने से वर्ग कक्ष में पढ़ाई कर रहे पांच बच्चे व बच्चियां बुरी तरह जख्मी हुई हैं. सीतामढ़ी सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में सभी का इलाज भी हुआ है, लेकिन पुलिस के स्तर पर अस्पताल द्वारा भेजी गयी ओडी स्लीप के बावजूद घटना का बयान तक दर्ज नहीं किया गया. — स्कूल के बरामदा की छत का प्लास्टर भी डैमेज गुरुवार को घटना में जख्मी बच्चों के अभिभावक व स्थानीय ग्रामीण स्कूल पहुंंचे और प्रधानाध्यापक के साथ उस वर्ग कक्ष को देखा, जहां प्लास्टर गिरने से बच्चे जख्मी हुए थे. सुरक्षा का हवाला देकर बच्चों के अभिभावकों ने फिलहाल बच्चों को स्कूल भेजने से मना कर दिया है. स्थानीय निवासी पवन राय, किशोरी कापर, नागेंद्र राय, उमेश राय आदि ने बताया कि विद्यालय में मरम्मति के बाद ही वह बच्चों को पढ़ने भेजेंगे. हमलोगों के मन में आशंका है कि विद्यालय में मरम्मति कराए गए सभी कार्य गुणवत्ताहीन है. इसकी जवाबदेही कौन लेगा कि विद्यालय में मरमत्ति कराया गया प्लास्टर अब नहीं गिरेगा? — डरे हैं बच्चे, इसीलिए नहीं आ रहे स्कूल : प्रधानाध्यापक प्रधानाध्यापक मुकेश कुमार झा ने बताया कि घटना के बाद से बच्चे व बच्चों व उनके परिजनों के बीच डर व दहशत इतना है कि वह बच्चों को नहीं भेज रहे हैं. साथ हैं शिक्षक भी डर के साए में हैं. बच्चों के नहीं आने की स्थिति में वर्ग संचालन नहीं हो रहा है.
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