मर के भी जिंदा रहने का अनमोल वरदान है नेत्रदान

विश्व नेत्रदान दिवस के अवसर पर सोमवार को चकमहिला स्थित द स्पेस ऑडोटोरियम में कला-संगम एवं पं चंद्रशेखर धर शुक्ल साहित्यिक व सांस्कृतिक संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में विचार गोष्ठी सह सम्मान समारोह का आयोजन किया गया.

सीतामढ़ी. विश्व नेत्रदान दिवस के अवसर पर सोमवार को चकमहिला स्थित द स्पेस ऑडोटोरियम में कला-संगम एवं पं चंद्रशेखर धर शुक्ल साहित्यिक व सांस्कृतिक संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में विचार गोष्ठी सह सम्मान समारोह का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता शिक्षाविद् डॉ नवल प्रसाद यादव ने की. संचालन गीतकार गीतेश ने किया. सम्मान समारोह में सीतामढ़ी के दधीचि के नाम से प्रसिद्ध राम सकल राय को अंग-वस्त्र, पुष्प-गुच्छ एवं पुस्तक देकर सम्मानित किया गया. मौके पर वक्ताओं ने कहा कि प्रत्येक वर्ष विश्व के विभिन्न देशों में नेत्रदान की महत्ता को समझते हुए 10 जून को अंतरराष्ट्रीय नेत्रदान दिवस मनाया जाता है.राम सकल राय ने सिर्फ नेत्रदान ही नहीं किया, बल्कि अपना पूरा शरीर ही दान कर दिया है जो कि आनेवाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा है. वक्ताओं में निदेशक उमेश कुमार, समाजसेवी प्रमोद नील, शिक्षाविद् राम बहादुर सिंह, योग गुरु सीए शशिभूषण, डॉ नवल प्रसाद यादव आदि मुख्य थे. गीतकार गीतेश ने अपनी रचना ””””””””अपने मतलब के लिए मत मौसमी बन कर देखिए, हो सके तो किसी की आंखों की रौशनी बन कर देखिए”””””””” से दृष्टि दान के महत्त्व की ओर इंगित किया.

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