सीतामढ़ी. सात सूत्री मांगों के समर्थन में बुधवार को आशा कार्यकर्ताओं ने डुमरा पीएचसी में धरना दिया. जिला उपाध्यक्ष मुन्नी कुमारी के नेतृत्व में आशा द्वारा विभाग के प्रति नारेबाजी की गई. ””बिहार का सोता है, आशा का बच्चा रोता है””, स्वास्थ्य मंत्री मुर्दाबाद, आशा को वेतन देना होगा, मनमानी नहीं चलेगी… जैसे नारे लगाए.
क्या हैं इनकी सात सूत्री मांगें
इनकी मांगों में क्रमशः 2023 में हुए समझौते के अनुरूप आशा व आशा फैसिलिटेटर का मानदेय 10 हजार रूपये करने, पिछले छह माह से लंबित मानदेय का भुगतान अविलंब कर दोषी अधिकारियों पर जिम्मेवारी तय करने, बकाया का भुगतान कर पोर्टल व्यवस्था में सुधार करने, रिटायरमेंट की उम्र सीमा 65 वर्ष कर सेवानिवृत्ति के समय 10 लाख का रिटायरमेंट पैकेज देने, अनिवार्य मासिक पेंशन की सुविधा देने, विभिन्न कार्यों के लिए तय प्रोत्साहन राशि का उसका पुनरीक्षण करने, केंद्र व राज्य सरकार द्वारा सम्मिलित विमर्श के आधार पर आशा व आशा फैसिलिटेटर को 21000 रूपये बेसिक न्यूनतम मानदेय निर्धारित करने, हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर से जुड़ी आशा को देय राशि का भुगतान पोर्टल के माध्यम से करने व सेंटर से आशा फैसिलिटेटर को भी जोड़ने इत्यादि शामिल है. मौके पर जिला कोषाध्यक्ष रानी झा, पुष्पा कुमारी, प्रखंड अध्यक्ष विभा कुमारी, सचिव मंजू कुमारी, कोषाध्यक्ष किरण कुमारी, मधु देवी, प्रतिभा देवी व रेखा देवी समेत अन्य मौजूद थी.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
