सीतामढ़ी : नगर परिषद की ओर से शहर के लोगों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने का दावा किया जाता है. पेयजल के नाम पर प्रति वर्ष लाखों रुपये खर्च किये जाने के बावजूद गरमी का मौसम आते ही शहर में पेयजल को लेकर मारामारी की स्थिति उत्पन्न होना नगर परिषद प्रशासन पर कई सवाल खड़ा करता है. आखिर इतने खर्च के बाद भी शहरवासियों को जलसंकट से क्यों जूझना पड़ रहा है? खास बात यह कि आजादी के 70 साल बाद भी शहर के किसी भी वार्ड के लोगों को नल के माध्यम से पानी की आपूर्ति नहीं की जा सकी है.
गरमी के मौसम में प्यास बुझाने को मारामारी
सीतामढ़ी : नगर परिषद की ओर से शहर के लोगों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने का दावा किया जाता है. पेयजल के नाम पर प्रति वर्ष लाखों रुपये खर्च किये जाने के बावजूद गरमी का मौसम आते ही शहर में पेयजल को लेकर मारामारी की स्थिति उत्पन्न होना नगर परिषद प्रशासन पर कई सवाल खड़ा […]

हालांकि, सात निश्चय के तहत हर घर नल का जल योजना अंतर्गत करीब 23 करोड़ की लागत से शहर में चार नये जल मीनार का निर्माण कार्य प्रगति पर है. शहर के अधिकतर हिस्सों में पाइप लाइन बिछाने का काम पूरा कर लिया गया है, लेकिन शहर के लोगों को अब भी नल से जल की आपूर्ति का इंतजार है.
शरीर जला देने वाले धूप व भीषण गरमी के बीच शहर व जिले भर से प्रतिदिन आने वाले हजारों लोगों को पेयजल के लिए किस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, इसको लेकर प्रभात खबर की टीम ने शनिवार को शहर के विभिन्न हिस्सों में जाकर जायजा लिया तो नगर परिषद के दावों की हवा निकल गयी.
मरम्मत के अभाव में दर्जनों चापाकल बंद : शहर के मुख्य मार्गों में मेहसौल चौक से जानकी स्थान तक दर्जन भर चापाकल गाड़ा गया है. इसी तरह मेहसौल चौक से कारगिल चौक तक आधा दर्जन से अधिक चापाकल गाड़ा गया है. थाना रोड, सिनेमा रोड, मेला रोड, गुदरी रोड, अस्पताल रोड, दीपक स्टोर गली, रिंग बांध व कोट बाजार के विभिन्न पथों पर दर्जनों सरकारी चापाकल गाड़े गए हैं, लेकिन इनमें से करीब 70 फीसदी चापाकल बंद पड़े हैं.
कुछ चापाकल चालू दिखे, जिसपर पानी पीने के लिए राहगीरों की भीड़ लगी हुई थी. कोट बाजार स्थित रानी सती मंदिर मार्ग में करीब आधे किमी की दूरी में सैकड़ों की आबादी के बीच मात्र एक चापाकल दिखा. वह भी बंद. स्थानीय लोगों ने बताया कि काफी प्रयास के बाद चापाकल का मरम्मत कराया जाता है, लेकिन चापाकल ज्यादातर बंद ही रहता है. वार्ड-21 स्थित स्लम बस्ती में देखा गया कि वहां के सौ से भी अधिक परिवारों के बीच करीब आधा दर्जन सरकारी चापाकल गाड़े गए हैं, लेकिन उनमें से मात्र दो चापाकल ही चालू थे, जिस पर पानी पीने के लिए लोगों की भीड़ लगी हुई थी.
बाइपास रोड स्थित रिंग बांध किनारे बसे बस्ती के लोगों से पूछे जाने पर बताया गया कि वहां चापाकल की संख्या काफी कम है. जितने चापाकल गाड़े गए हैं, उनमें से भी अधिकतर चापाकल बंद पड़े हैं, जिसके चलते पानी भरने के लिए चालू कुछ चापाकलों पर काफी भीड़ उमड़ती है.
जानकी मंदिर में एकमात्र चापाकल चालू : पर्यटन की दृष्टिकोण से शहर के सबसे महत्वपूर्ण स्थानों में जानकी मंदिर का नाम आता है, लेकिन जानकी मंदिर में भी श्रद्धालुओं को पेयजल के लिए संकट का सामना करना पड़ रहा है. मंदिर परिसर में केवल दो चापाकल गाड़े गए हैं. एक पूर्वी द्वार पर व दूसरी मंदिर से पश्चिम दिशा में निकलने वाले रास्ते किनारे. पूर्वी गेट स्थित चापाकल की मरम्मत की जा रही थी. जबकि, एकमात्र चालू चापाकल पर जलजमाव के बीच पानी पीने के लिए लोगों की भीड़ लगी हुई थी.
स्थानीय दुकानदारों ने बताया कि जलनिकासी नहीं होने के चलते नाले का पानी सड़क पर ही बहता है, जिसके चलते चापाकल के चारों ओर अक्सर जलजमाव की स्थिति रहती है. जलजमाव के चलते श्रद्धालुओं को नाला दिखाई नहीं देता है, जिसके चलते प्रतिदिन महिलाएं व बच्चे फिसलकर नाले में गिरकर जख्मी हो जाते हैं. मंदिर प्रबंधन व नगर परिषद से बार-बार शिकायत करने के बावजूद भी लोगों की तकलीफों को दूर करने का प्रयास नहीं किया जा रहा है.