कवायद . िजलािधकारी ने कृषि विभाग के प्रधान सचिव को भेजा पत्र
वर्षापात में औसतन 43.94 प्रतिशत की है कमी
सरकार को भेजी िरपोर्ट
सीतामढ़ी : बारिश के अभाव में धान के खेतों में दरार पड़ गये है. यह देख किसान चिंतित है. ऐसी स्थिति बनी रहती तो खरीफ फसल की खेती में हुए खर्च भी नहीं लौट पायेंगे. किसानों के इस हालात को डीएम राजीव रौशन ने भी महसूस किया है.
काफी विचार-विमर्श व स्थिति का आंकलन करने के बाद डीएम श्री रौशन ने कृषि विभाग के प्रधान सचिव से सीतामढ़ी जिला को खरीफ 2016 में सुखाड़ घोषित करने की अनुशंसा की है. कृषि व सहकारिता विभाग के साथ ही भारत सरकार के कृषि मंत्रालय के स्तर से फरवरी 2016 में निर्गत सुखाड़ प्रबंधन से संबंधित संकेतों के आधार पर सुखाड़ घोषित करने की अनुशंसा की गयी है. इसके पीछे डीएम द्वारा पर्याप्त व ठोस आधार दिया गया है.
क्या है डीएम का तर्क: कृषि विभाग को भेजे पत्र में डीएम श्री रौशन ने कहा है कि इस जिला का मुख्य फसल धान है. छोटे-छोटे किसानों द्वारा मक्के की भी बोआई की जाती है. 15 अगस्त तक धान की रोपनी की जाती है.
यदि जून से 15 अगस्त के बीच वर्षापात में 40 प्रतिशत या उससे अधिक की कमी होती है तो उसे सुखाड़ का आधार अपनाया जा सकता है. सीतामढ़ी में इस अवधि में वर्षापात में औसतन 43.94 प्रतिशत की कमी है. इसे डीएम ने सुखाड़ की घोषणा करने के लिए अनुशंसा करने का पहला एवं स्वतंत्र आधार बताया है. सरकार को वर्षापात की रिपोर्ट भी भेजी गयी है.
खरीफ फसलों पर प्रतिकूल असर : सरकार को यह भी जानकारी दी गयी है कि जिला में विलंब से मानसून का आगमन व विखंडित वर्षापात के बावजूद जून व जुलाई में लगभग 50 प्रतिशत से अधिक वर्षापात होने से 98 फीसदी धान की रोपनी हुई है, लेकिन जून से अगस्त तक के वर्षापात में संयुक्त रूप से 40 प्रतिशत से अधिक वर्षापात की कमी हो गयी. अगस्त में अल्पवृष्टि/अनावृष्टि के कारण फसल के सूखने व मुरझाने की स्थिति देखी जा रही है. खेतों में लगातार नमी की कमी देखी जा रही है.
धान के फसल सुख रहे है. बताया गया है कि 20 अगस्त को जिला समन्वयक एवं अनुश्रवण समिति की बैठक में अध्यक्ष व अन्य सदस्यों द्वारा जिला को सुखाड़ घोषित करने की मांग उठायी गयी थी. बता दें कि आपदा प्रबंधन विभाग के सरकार के संयुक्त सचिव के पत्र के आलोक में 27 अगस्त को जिला कृषि टास्क फोर्स की संपन्न विशेष बैठक में जिला को सुखाड़ घोषित करने की अनुशंसा करने का निर्णय लिया गया.
