लापरवाही. नवजात बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे डॉक्टर
सरकारी व गैर सरकारी चिकित्सालयों में सत्यापित तराजू नहीं
सीतामढ़ी : धरती के भगवान की संज्ञा पाने वाले सरकारी व गैर सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था नवजात बच्चों के जिंदगी से भी खिलवाड़ कर रहे है.
जन्म के बाद नवजात बच्चों को मानक के अनुसार दवा मिला रहा है या नहीं, यह कहना संभव नहीं है. कारण है कि नवजात के जन्म के बाद सबसे पहले उसका वजन इलेक्ट्रिक मशीन (तराजू) पर किया जाता है.
वजन के हिसाब से नवजात की दवा तय की जाती है, लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि शहर के एक भी सरकारी व गैर सरकारी चिकित्सालय में माप-तौल विभाग द्वारा सत्यापित इलेक्ट्रिक मशीन नहीं है. इस परिस्थिति में नवजात के समुचित इलाज का दावा नहीं किया जा सकता है.
सदर अस्पताल में भी नियम का पालन नहीं: सरकार का नियम है कि किसी भी प्रकार के तराजू का उपयोग करने से पहले उसे माप-तौल विभाग से सत्यापित कराना है.
ऐसा नहीं करने पर इसे गैर कानूनी माना जाता है. जिसके लिए माप-तौल विभाग को दोषी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराते हुए अन्य कार्रवाई करने का अधिकार प्राप्त है.
प्रभात खबर जांच-पड़ताल में यह सामने आया है कि शहर के किसी सरकारी व गैर सरकारी चिकित्सालय में मानक के अनुसार तराजू नहीं है. स्वास्थ्य विभाग से जुड़े लोग बताते है कि जन्म के बाद नवजात के वजन के अनुसार उसके स्वस्थता का अनुमान लगाया जाता है.
वजन के आधार पर दवाई व डोज निर्धारित किया जाता है. वजन सही नहीं होने पर दवा की मात्रा कम या अधिक होने पर नवजात के जीवन को खतरा हो सकता है. दिलचस्प बात यह है कि सरकारी की स्पष्ट नीति के बाद भी यह परंपरा वर्षों से बेरोक टोक चली आ रही है. यह परंपरा सदर अस्पताल में भी लागू है.
वजन के हिसाब से तय की जाती है दवा
नवजात के समुचित इलाज का दावा नहीं किया जा सकता
सरकार की स्पष्ट नीति के बाद भी चल रही परंपरा
नियम को लेकर स्वास्थ्य विभाग गंभीर नहीं: नवजात बच्चों के जीवन को लेकर स्वास्थ्य विभाग की गंभीरता नहीं दिखायी दे रही है. कारण है कि सरकारी व गैर सरकारी चिकित्सालयों में तराजू का सत्यापन नहीं कराने को लेकर माप-तौल विभाग की ओर से छह दिसंबर 2012 को पत्र लिख कर अनियमितता की शिकायत करते हुए आवश्यक कार्रवाई करने को कहा था, किंतु स्थिति यह है कि अब तक माप-तौल विभाग के पत्र को तरजीह देकर किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गयी है.
वरीय अिधकािरयों को कराया जायेगा अवगत
अधीक्षक मुजफ्फर आलम का कहना है कि यह सच है कि शहर में एक भी चिकित्सालय में तराजू का सत्यापन नहीं कराया गया है. जिसके कारण बच्चों के जिंदगी को खतरा बना रहता है. बगैर सत्यापन के बच्चों के वजन के सत्यता का दावा नहीं किया जा सकता. विभाग की ओर से सिविल सर्जन को पत्र लिखा जा चुका है. वरीय पदाधिकारियों को भी पत्र लिख कर स्थिति से अवगत कराया जायेगा.
