चचरी पुल से गिरकर कई लोग हो चुके हैं जख्मी
पंचायत के लोगों को आने-जाने में हो रही भारी परेशानी
गांव से बाहर निकलने का एकमात्र है रास्ता
सीतामढ़ी : जिला मुख्यालय से पांच किमी उत्तर और तीन किमी पश्चिम में स्थित मेथौरा गांव आज भी विकास की बयार से काफी पीछे है.
गांव के बीचों-बीच गुजरी लखनदेई नदी में पुल का निर्माण नहीं होने के कारण सरेह के रास्ते गांव से बाहर निकलने के लिए लोग चचरी पुल के सहारे ही आवागमन करते आ रहे है.
ग्रामीण राकेश सहनी ने बताया कि एक चचरी पुल से होकर बेली गांव के लोग आते-जाते है तो दूसरे चचरी पुल से किसान व अन्य लोग खेतों में काम करने के लिए आते-जाते है. इतना ही नहीं यह सड़क बाजितपुर सब्जी मंडी व प्रखंड मुख्यालय जाने के लिए प्रमुख है. इस कारण देर रात तक इस चचरी पुल से होकर लोग आवागमन करते है. इस दौरान कई लोग चचरी से गिरकर जख्मी भी हो चुके है. खासकर साइकिल या सिर पर सब्जी लाद चचरी से गुजरने में लोग गिरकर जख्मी हो चुके है.
रामलगन महतो ने बताया कि दो साल पूर्व बेली गांव से पूजा अर्चना कर लौट रही करीब एक दर्जन कुंवारी कन्याएं चचरी पुल से पानी में गिर गयी थी, लेकिन स्थानीय लोगों की तत्परता से सभी कन्याओं को पानी से निकल लिया गया था. इस घटना में करीब आधा दर्जन लड़की बुरी जख्मी हो गयी थी.
हर साल 50 हजार रुपये खर्च कर लोग बनाते हैं पुल
हर साल चंदा लगाकर बनता है चचरी पुल
ग्रामीण नीला देवी ने बताया कि करीब 10 वर्ष से ग्रामीणों द्वारा प्रत्येक साल चंदा लगाकर चचरी पुल का निर्माण कराया जाता है. लोगों का अधिक आवागमन होने के कारण एक साल में ही चचरी पुल टूटकर क्षतिग्रस्त हो जाता है. मजबूरन लोगों को प्रत्येक साल चचरी पुल बनाने में करीब 50 हजार रुपये की खर्च करना पड़ता है. कभी-कभी तो पैसे के अभाव में चचरी पुल का मरम्मत समय पर नहीं हो पाता है. तब जर्जर चचरी पुल से होकर लोगों को गुजरा और भी मुश्किल हो जाता है.
पुल बनाने की दिशा में होगी पहल: मुखिया राजेश वात्सयान ने कहा कि वे इस समस्या से अवगत है. वे अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह करते हुए पुल बनाने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई करेंगे.
