केरल के रशीद के प्यार में पड़ आइएस से जुड़ने जा रही थी सीतामढ़ी की यास्मीन

पटना/सीतामढ़ी : सीतामढ़ी जिले के बाजपट्टी थाने के मुरौल गांव की मूल निवासी यास्मीन कुछ सालों से केरल के पीस इंटरनेशनल संगठन से जुड़ कर काम करती थी. पति से तलाक होने के बाद वह केरल के कासरागोड स्थित इस संस्थान में ही ज्यादातर रहती थी. इसी दौरान उसका संपर्क अब्दुल रशीद से हुआ. अब्दुल […]

पटना/सीतामढ़ी : सीतामढ़ी जिले के बाजपट्टी थाने के मुरौल गांव की मूल निवासी यास्मीन कुछ सालों से केरल के पीस इंटरनेशनल संगठन से जुड़ कर काम करती थी. पति से तलाक होने के बाद वह केरल के कासरागोड स्थित इस संस्थान में ही ज्यादातर रहती थी. इसी दौरान उसका संपर्क अब्दुल रशीद से हुआ. अब्दुल रशीद पर आरोप है कि वही केरल में इस्लामिक स्टेट (आइएस) का मुख्य सूत्रधार है. वह आइएस का सबसे प्रमुख मॉड्यूल है, जिसने

केरल के रशीद
दर्जनों पढ़े-लिखे युवाओं को केरल से बाहर आइएस से जुड़ने के लिए भेजा है. कुछ महीने पहले वह काबुल भाग गया. अब्दुल रशीद और यास्मीन में प्यार हो गया. रशीद ने उसे काबुल चल कर आइएस से जुड़ने के लिए प्रेरित किया. बस इसी प्यार में पड़ कर वह सब कुछ छोड़ कर काबूल जाने के फिराक में थी.
आइएस जाने वाली उत्तर भारत की यह पहली महिला
भारत से जाकर आइएस ज्वाइन करने की चाहत रखनेवालों की लिस्ट में बिहार का भी नाम जुड़ गया है. यास्मीन उन 21 युवाओं के जत्थे में शामिल है, जो केरल से नयी दिल्ली होते हुए काबुल जा रही थी. लेकिन, दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर रविवार की सुबह इन्हें दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. यह उत्तर भारत में किसी महिला के आइएस से जुड़ने का यह पहला वाकया सामने आया है. पूरे भारत में किसी महिला के इस प्रतिबंधित आतंकी संगठन से जुड़ने का यह दूसरा मामला सामने आया है. इससे पहले हैदराबाद में एक महिला पकड़ी गयी थी, जो आइएस से जुड़ने के लिए बाहर जा रही थी.
काबुल से लगातार बात करता था रशीद
केरल के पीस संगठन से कुछ महीने पहले 19 लड़के अचानक गायब हो गये थे. बाद में पता चला कि ये सभी आइएस से जुड़ने के लिए बाहर चले गये हैं. इसी दौरान अब्दुल रशीद भी गायब हो गया था. तब केरल खुफिया तंत्र के कान खड़े हो गये और उसने एनआइए के साथ मिल कर लगातार मॉनीटरिंग शुरू की. इसी क्र म में यास्मीन के मोबाइल पर काबुल से रशीद की लगातार बातचीत होने के कई कॉल को ट्रैक और रेकॉर्ड किया गया. इसमें इस्लामिक जीवन जीने के लिए आइएस से जुड़ने के लिए प्रेरित करने से लेकर तमाम अहम बातों की जानकारी खूफिया तंत्र को हुई. इसके बाद से ही सुरक्षा एजेंसियां यास्मीन और अन्य लोगों के पीछे पड़ गयीं, जिनकी गिरफ्तारी रविवार को नयी दिल्ली एयरपोर्ट से हुई. गिरफ्तारी के थोड़ी देर पहले भी यास्मीन की रशीद से लंबी बात हुई थी.
यास्मीन के बिहार से ताल्लुक होने की बात पर पुलिस महकमा के तमाम उच्चाधिकारी कुछ भी कहने से परहेज करते रहे. अधिकारियों का कहना था कि उनके पास इसको लेकर कोई ठोस सूचना नहीं है. फिलहाल वे तमाम पहलूओं पर जांच कर रहे हैं, इसके बाद ही कुछ भी कह सकेंगे.
15 साल बाद ईद में आयी थी गांव
स्थानीय लोगों की मानें, तो यास्मीन लगभग 15 साल के बाद इस साल ईद में घर आयी थी. गांव में इसका घर में गिर गया था. किसी तरह से यहां रह रही थी. बताते हैं कि गांव में रहने के दौरान यास्मीन अपना पासपोर्ट बनवाना चाहती थी. इसके लिए वो लगातार समाहरणालय का चक्कर लगा रही थी. यास्मीन का पासपोर्ट बन पाया या नहीं. इसके बारे में पता नहीं चल पाया है, लेकिन बताते हैं कि वो पासपोर्ट के लिए लगातार प्रयास कर रही है. उसके बारे में एक बात और सामने आयी है कि वो पांचों वक्त की नवाज पढ़ती थी और बीमारी होने पर भी वो नमाज जरूर पढ़ती थी. जिन लोगों ने यास्मीन को देखा है. उनके मुताबिक वो इंटरनेट पर लगातार सक्रिय रहती थी. सोशल साइट्स पर वो लगातार आपरेट करती थी. यास्मीन के ग्रामीण उसे अच्छी महिला मानते हैं. उन्हें यकीन नहीं हो रहा है कि वो आतंकी संगठन में शामिल होने के लिए काबुल जा रही थी.
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इस्लामिक जीवन जीने की थी चाहत
नयी दिल्ली से इन्हें केरल ले जाया गया, जहां इन्हें कासरागोड कोर्ट में पेश किया गया. इन सभी पर अनलॉफूल एक्टिविटीज प्रीवेंशन एक्ट (यूएपीए ) के तहत मामला दर्ज किया गया है. युवाओं की इस जमात में यास्मिन भी शामिल है. उससे जब पूछा गया कि वह ऐसा क्यों कर रही थी, तो उसने जवाब दिया, मैं पूरी तरह से इस्लामिक जीवन जीना चाहती हूं, जो भारत में संभव नहीं है. इस वजह से काबुल जाकर आइएस से जुड़ना चाहती थी. मैं अपने पांच साल के बेटे को भी इसी वजह से साथ ले जा रही थी कि वह भी बड़ा होकर पूरी तरह से इस्लामिक जीवन को अपना सके.
सउदी अरब चले गये हैं यास्मीन के पिता : सीतामढ़ी. यास्मीन बचपन से ही अपने परिवार के साथ दिल्ली में रहती थी. पिता टेलरिंग से जुड़े हुए थे. इसकी पढ़ाई भी दिल्ली में हुई थी. लगभग आठ साल पहले यास्मीन के पिता दिल्ली से सउदी अरब चले गये थे, जबकि वह दिल्ली में ही रह रही थी.
सउदी अरब चले गये…
यहीं पर इसकी शादी हुई थी. यास्मीन बाजपट्टी इलाके मुरौल गांव की रहनेवाली है, जबकि इसकी शादी प्रखंड के ही हुमायूंपुर के रहनेवाले मोहम्मद तैयब उर्फ छोटू से हुई थी. बताया जाता है कि छोटू रिश्ते में यास्मीन का फुफेरा भाई है और वह भी दिल्ली में रहता है. दो साल पहले यास्मीन का तलाक हो गया था. इसके बाद ही यास्मीन केरल चली गयी थी.
15 साल बाद ईद में आयी थी घर
स्थानीय लोगों की मानें, तो यास्मीन लगभग 15 साल के बाद इस साल ईद में घर आयी थी. गांव में इसका घर में गिर गया था. किसी तरह से यहां रह रही थी. बताते हैं कि गांव में रहने के दौरान यास्मीन अपना पासपोर्ट बनवाना चाहती थी. इसके लिए वह लगातार समाहरणालय का चक्कर लगा रही थी.
पासपोर्ट के लिए लगा रही थी चक्कर
यास्मीन का पासपोर्ट बन पाया या नहीं. इसके बारे में पता नहीं चल पाया है, लेकिन बताते हैं कि वो पासपोर्ट के लिए लगातार प्रयास कर रही है. उसके बारे में एक बात और सामने आयी है कि वह पांचों वक्त की नवाज पढ़ती थी और बीमारी होने पर भी वो नमाज जरूर पढ़ती थी.
नेट पर रहती थी सक्रिय
जिन लोगों ने यास्मीन को देखा है. उनके मुताबिक वो इंटरनेट पर लगातार सक्रिय रहती थी. सोशल साइट्स पर वो लगातार आपरेट करती थी. साथ ही नेट के जरिये देश-दुनिया में क्या हो रहा है. इसकी जानकारी रखती थी.

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