तैयारी. पुलिस वालों को मिला शमन की शक्ति का अधिकार
मोटर वाहन अिधनियम से जुड़ा मामला
सीतामढ़ी : मोटर वाहन अधिनियम को सशक्त तरीके से लागू कराने के लिए राज्य सरकार ने पुलिस को भी शमन का अधिकार दिया है.परिवहन विभाग के प्रधान सचिव ने सभी डीएम, एसएसपी व एसपी को पत्र भेज कर यह जानकारी देते हुए अपने-अपने जिला में प्रभावकारी तरीके से यह शमन की शक्ति का उपयोग करने को कहा है. पुलिस पदाधिकारियों को शमन की शक्ति का अधिकार एक वर्ष के लिए दिया गया है. इसके तहत मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 177 से 190 के तहत कार्रवाई का अधिकार दिया गया है.
बताया गया है कि मोटर वाहन अधिनियम 1988 के अधीन बनाये गये धारा 177 के तहत विनियम या अधिसूचना के किसी उपबंध के उल्लंघन के लिए दोषी पाये जाने पर प्रथम अपराध के लिए सौ रुपया जुर्माना एवं इसके बाद के अपराध के लिए अधिकतम तीन सौ रुपया जुर्माना हो सकता है. इसी प्रकार 178 के तहत बिना पास या टिकट यात्रा करने एवं कंडक्टर द्वारा कर्तव्य के लिए अवहेलना करने पर दंड का प्रावधान है. आदेश का उल्लंघन, बाधा उत्पन्न करने व सूचना देने से इनकार करने पर धारा 179 के तहत पांच सौ रुपया जुर्माना व एक माह का कारावास का प्रावधान है.
धारा 181 के तहत बिना ड्राइविंग लाइसेंस या 18 साल से कम उम्र के बच्चे द्वारा गाड़ी का परिचालन करने पर पांच सौ रुपया जुर्माना व तीन माह के कारावास की सजा है. गाड़ी की सही बनावट एवं उचित रख-रखाव के अभाव पर एक से पांच हजार रुपया तक अर्थदंड की सजा. निर्धारित गति से अधिक गाड़ी का परिचालन करने पर एक से पांच हजार रुपया तक जुर्माना. खतरनाक तरीके व शराब पीकर गाड़ी का परिचालन करने पर दो हजार जुर्माना व छह माह कारावास की सजा हो सकती है. मानसिक या शारीरिक रूप से अस्वस्थ रहते हुए गाड़ी का परिचालन करने पर दो सौ रुपया की सजा का प्रावधान है. इसी प्रकार धारा 187 के तहत दुर्घटना संबंधित पहले अपराध के लिए पांच सौ रुपया जुर्माना व तीन माह कारावास का प्रावधान है. गति का मुकाबला करने पर पांच सौ जुर्माना व एक माह कैद की सजा है.
सीतामढ़ी .पुलिस विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्यरत कर्मचारी एवं पदाधिकारी अपने निजी वाहन पर पुलिस का मोनोग्राम नहीं लगायेंगे. अपराध अनुसंधान विभाग के अपर पुलिस महानिदेशक ने सभी जिला के एसपी को पत्र भेज कर यह जानकारी दी है. कहा है कि प्राय: ऐसा देता जा रहा है कि पुलिस में विभिन्न स्तरों पर कार्यरत कर्मचारी एवं पदाधिकारी द्वारा अपने निजी वाहन पर पुलिस का मोनोग्राम बनवा कर परिचालन करते है. यह समव्यवहार एमभी एक्ट की धारा 206/207 एवं भादवि की धारा 464 के अंतर्गत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है. पुलिसकर्मियों के इस कार्य को रोकना है. अपर पुलिस महानिदेशक ने अपने पत्र में स्पष्ट तौर पर कहा है कि वस्तु स्थिति की जांच में दोषी पाये जाने वाले पुलिसकर्मी के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित किया जाये. जांच के दौरान ही पुलिसकर्मी के वाहन पर अंकित पुलिस के मोनोग्राम का विरुपरण कराना भी सुनिश्चित किया जाना है.
