सीतामढ़ी : नयी नगर सरकार का गठन हो चुका है. नवनिर्वाचित मुख्य व उपमुख्य पार्षद समेत सभी वार्ड पार्षद पद एवं गोपनीयता की शपथ भी ले चुके हैं. अब कार्यभार संभालने की बारी है. नवनिर्वाचित मुख्य पार्षद विभा देवी व उपमुख्य पार्षद दीपक मस्करा ने बताया कि शुक्रवार को बोर्ड की पहली बैठक होगी, जिसकी तैयारी की जा रही है. उसी दिन मुख्य व उपमुख्य पार्षद के अलावा सभी नवनिर्वाचित पार्षद अपना कार्यभार संभालेंगे. बताया कि नयी नगर सरकार पूरी पारदर्शिता के साथ चलेगी. नगर के जिन हिस्सों में विकास कार्य अधूरे रह गये हैं, वहां तक विकास पहुंचाने की पूरी कोशिश होगी.
स्वच्छता : शहर में यत्र-तत्र फैली गंदगी भी शहर वासियों के समक्ष एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. पूरे देश में स्वच्छता अभियान चल रहा है, लेकिन शहर में स्वच्छता अभियान पूरी तरह फेल है. शहर का एक भी वार्ड नहीं है, जहां स्वच्छता झलकता हो. सड़क व नाला ही कचरा फेंकने की जगह बनी हुई है. गंदगी के चलते शहर में मच्छरों का साम्राज्य स्थापित हो गया है. टूटे नालियों का गंदा पानी सड़क पर बहता है. गंदगी के चलते महामारी की आशंका बनी रहती है. शहर के कूड़े-कचरे को शहर के रिंग बांधों पर ही जमा किया जाता है, जिससे आसपास के क्षेत्र में रहने वाले परिवारों को असहनीय दुर्गंध का सामना वर्षों से करना पड़ रहा है, इसलिए शहर को स्वच्छ शहर की रैकिंग में लाने के लिए नयी नगर सरकार को स्वच्छता अभियान को जमीन पर उतारने की कड़ी चुनौती होगी.
जलनिकासी : जल जमाव शहर की सबसे प्रमुख समस्याओं में से एक है, जो शहर वासियों के लिए दशकों से नासूर बना हुआ है. शहर स्थित कई नासी-नालों को अतिक्रमण कर जल निकासी बंद कर दिया गया है. कई नासी-नालों को कूड़े-कचरों से भरकर जाम कर दिया गया है, जिसके चलते बरसात के मौसम में चार महीने तक शहर वासियों को जल जमाव के बीच जिल्लत की जिंदगी जीनी पड़ती है. शहर के आधे से भी अधिक वार्डों में जलजमाव व कीचड़ का करीब छह माह तक साम्राज्य स्थापित हो जाता है. इस दौरान स्कूली बच्चों व महिलाओं को सबसे अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है. इन समस्याओं से निजात दिलाने के लिए नासी-नालों को अतिक्रमणमुक्त कराकर जलनिकासी का प्रबंध कराना नयी नगर सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी.
ट्रैफिक जाम : बढ़ती जनसंख्या व मोटर वाहनों की संख्या ने पूरे शहर को अस्त-व्यस्त कर दिया है. शहर के विभिन्न प्रमुख चौक-चौराहों पर प्रतिदिन लगने वाला महाजाम शहर के लोगों के सामने दूसरी सबसे बड़ी समस्या है. खास बात यह कि नगर परिषद की ओर से शहर में एक भी वाहन पार्किंग की व्यवस्था नहीं की गयी है. इसके अलावा शहर के सभी रिंग बांध पूरी तरह जर्जर हो चुकी है. दुकानदारों द्वारा नियमों को ताक पर रखकर सड़कों तक दुकान फैला दिया जाता है. मुख्य सड़कों पर रिक्शा-ठेला व फेरीवालों का कब्जा है. नो इंट्री का पालन नहीं कराया जाता है, जिसके चलते बड़े-बड़े वाहनों को धड़ल्ले से शहर में इंट्री करायी जाती है. इन तमाम कमियों को दूर कर जाम की समस्या से लोगों को निजात दिलाना भी नयी नगर सरकार के लिए चुनौती होगी.
सार्वजनिक शौचालय व मूत्रालय : शहर की आबादी तेजी से बढ़ी है. इसके अलावा जिले के सैकड़ों गांवों व पड़ोसी देश नेपाल से प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोग चिकित्सा कराने व खरीदारी करने समेत विभिन्न कामों से आते हैं, लेकिन हैरत की बात यह है कि यात्रियों के लिए शहर के किसी भी आवश्यक स्थानों पर सार्वजनिक शौचालय व मूत्रालय की व्यवस्था नहीं की गयी है. ऐसे में अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है कि शौच महसूस होने पर शहर में यात्रियों, खास कर महिला यात्रियों क्या हाल होता होगा. शहर के गुदरी व कोट बाजार में अलग-अलग दो पुराना सार्वजनिक शौचालय है, लेकिन उसका संचालन ठीक से नहीं किया जाता है. उसपर निजी लोगों का कब्जा है, इसलिए शहर के सभी आवश्यक स्थानों पर सार्वजनिक शौचालय व मूत्रालय का निर्माण कराकर यात्रियों को सुविधा पहुंचाना भी नयी नगर सरकार की चुनौती होगी.
पेयजल : शहर के सभी परिवार को नल से जल की आपूर्ति कराने के लिए करीब 23 करोड़ की लागत से जलापूर्ति योजना पर तेजी से काम चल रहा है. चार जलमीनारों का निर्माण अंतिम चरण में है, इसलिए जल्द ही शहर वासियों को पेयजल की आपूर्ति होने की संभावना बढ़ गयी है, लेकिन प्रतिदिन शहर में आनेवाले हजारों यात्रियों के सामने पेयजल का संकट बरकरार है. नगर परिषद की ओर से पेयजल पर हर वर्ष लाखों रुपये खर्च किया जाता है, बावजूद पेयजल की समस्या बनी हुई है. सार्वजनिक स्थलों पर गाड़े गये अधिकांश चापाकल मामूली खराबी के चलते बंद पड़ा रहता है, जिसके चलते पेयजल के लिए आम यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में यात्रियों के लिए आवश्यक स्थानों पर पेयजल मुहैया कराना भी नयी नगर सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती होगी.
