शिवहर से मनीष नंदन सिंह की रिपोर्ट
Sheohar News: बदलते मौसम और खेती की चुनौतियों के बीच शिवहर जिले के किसानों को वैज्ञानिक खेती, जल संरक्षण और प्राकृतिक कृषि के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाया गया. कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) शिवहर और आत्मा के संयुक्त तत्वावधान में “खेत बचाओ अभियान” के तहत जिले के कई गांवों में किसान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए. इसमें बड़ी संख्या में किसानों ने हिस्सा लेकर विशेषज्ञों से खेती के नए तौर-तरीके सीखे.
जल संरक्षण पर दिया गया जोर
डुमरी कटसरी प्रखंड के बहुआरा, पिपराही प्रखंड के डेकुली धरमपुर और शिवहर प्रखंड में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान केवीके के वैज्ञानिक डॉ. सौरभ शंकर पटेल ने किसानों को मौसम की मौजूदा परिस्थितियों से अवगत कराया. उन्होंने बताया कि भारतीय मौसम विभाग ने इस वर्ष सामान्य से कम बारिश की संभावना जताई है. ऐसे में किसानों को जल संरक्षण आधारित तकनीकों को अपनाने की जरूरत है, ताकि फसलों को पानी की कमी से बचाया जा सके.
धान की सीधी बुआई और प्राकृतिक खेती पर चर्चा
कार्यक्रम में किसानों को धान की सीधी बुआई, प्राकृतिक खेती और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी दी गई. वैज्ञानिकों ने बताया कि कम लागत में बेहतर उत्पादन के लिए प्राकृतिक खेती और संसाधनों के बेहतर उपयोग पर ध्यान देना जरूरी है.
फसल विविधीकरण और रोग प्रबंधन की सलाह
वैज्ञानिक डॉ. अनुराधा रंजन कुमारी ने खरीफ फसलों के वैज्ञानिक प्रबंधन पर विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने किसानों को धान, मक्का, अरहर, मूंग और उड़द की उन्नत किस्मों के चयन, संतुलित उर्वरक उपयोग और समय पर बुआई की सलाह दी. साथ ही फसल विविधीकरण, दलहनी फसलों को बढ़ावा देने और समेकित कीट प्रबंधन अपनाने पर भी जोर दिया.
फार्मर रजिस्ट्री के लिए किया प्रेरित
कार्यक्रम के अंत में आत्मा के अधिकारियों ने किसानों को फार्मर रजिस्ट्री के महत्व की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए किसानों का पंजीकरण आवश्यक है और सभी किसानों को इसमें शामिल होना चाहिए.
