शिक्षक दिवस स्पेशल: रोज 2 KM पैदल चलकर बच्चों को फ्री पढ़ाते हैं ये रिटायर्ड टीचर

रिटायरमेंट के बाद आराम करने के बजाय शिवहर के नागेंद्र साह ने बच्चों को मुफ्त पढ़ाने का संकल्प लिया. 81 साल की उम्र में भी वह रोज दो किलोमीटर पैदल विद्यालय पहुंचते हैं और स्कूल खुलने तक बच्चों को पढ़ाते हैं.

शिक्षक दिवस स्पेशल: आमतौर पर रिटायरमेंट के बाद लोग आराम की जिंदगी बिताना चाहते हैं, लेकिन शिवहर के 81 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षक नागेंद्र साह ने इसके बिल्कुल उलट रास्ता चुना है. 35 साल तक वेतन लेकर बच्चों को पढ़ाने के बाद अब वह पिछले 22 वर्षों से बिना किसी वेतन और स्वार्थ के गरीब बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं. उम्र के इस पड़ाव पर भी वह रोज घर से करीब दो किलोमीटर पैदल चलकर विद्यालय पहुंचते हैं और स्कूल खुला रहने तक बच्चों को पढ़ाते हैं.

पैरों में दर्द, फिर भी नहीं रुका पढ़ाने का सिलसिला

नागेंद्र साह का घर जिला मुख्यालय से करीब दो किलोमीटर पूरब महुअरिया गांव में है. उम्र बढ़ने के साथ उनके पैरों में दर्द रहने लगा है. परिवार के सदस्य और ग्रामीण उन्हें घर पर आराम करने की सलाह देते हैं, लेकिन नागेंद्र साह बच्चों को पढ़ाना नहीं छोड़ना चाहते.

उनका कहना है कि जब तक शरीर में जान है, तब तक वह बच्चों को निःशुल्क पढ़ाते रहेंगे. उनके लिए यही सच्ची समाज सेवा है. रोज पैदल विद्यालय पहुंचना उनके संकल्प के आगे उम्र की चुनौती को भी छोटा साबित करता है.

इस वजह से लिया मुफ्त पढ़ाने का संकल्प

31 अगस्त 2005 को श्रीनवाब सिंह उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से सेवानिवृत्त होने के बाद नागेंद्र साह ने स्कूल की स्थिति देखी. उन्हें महसूस हुआ कि शिक्षकों की कमी के कारण गरीब बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है. कई बच्चे ट्यूशन का खर्च नहीं उठा पाने के कारण पढ़ाई से दूर हो रहे थे.

इसके बाद उन्होंने तय किया कि वह अपने अनुभव का इस्तेमाल बच्चों की पढ़ाई के लिए करेंगे. तब से लेकर अब तक वह इसी विद्यालय में लगातार निःशुल्क शिक्षा दे रहे हैं.

वेतन से ज्यादा खुशी बच्चों को पढ़ाने में

नागेंद्र साह का कहना है कि 35 वर्षों तक वेतन लेकर पढ़ाने से कहीं ज्यादा आनंद उन्हें पिछले 22 वर्षों से निःशुल्क पढ़ाने में मिल रहा है. बच्चों के बीच रहना और उन्हें पढ़ते देखना ही उनके लिए सबसे बड़ा संतोष है.

वह तब तक स्कूल में रहते हैं, जब तक विद्यालय खुला रहता है. उम्र और शारीरिक परेशानी के बावजूद उनका यह नियमित प्रयास आसपास के लोगों के लिए भी प्रेरणा बना हुआ है.

ऐसे शुरू हुआ शिक्षक बनने का सफर

नागेंद्र साह का जन्म 26 अगस्त 1945 को महुअरिया गांव में स्व. भोला साह के घर हुआ था. उनकी माता का नाम समुन्दरी देवी है. उनकी शादी वर्ष 1966 में पिपराही प्रखंड के नारायणपुर गांव निवासी ठाकुर महतो की पुत्री लालवती देवी से हुई. उनके तीन बेटे और दो बेटियां हैं.

उनकी प्रारंभिक शिक्षा महुअरिया के प्राथमिक विद्यालय से हुई. इसके बाद उन्होंने शिवहर आदर्श मध्य विद्यालय से मिडिल स्कूल की पढ़ाई पूरी की. श्रीनवाब सिंह उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से वर्ष 1962 में हायर सेकेंडरी की परीक्षा पास की.

रिटायरमेंट के बाद भी नहीं थमे

इसी विद्यालय में 35 वर्षों तक शिक्षक के रूप में सेवा देने के बाद 31 अगस्त 2005 को सेवानिवृत्त हुए. लेकिन उनका शिक्षा से रिश्ता रिटायरमेंट के साथ खत्म नहीं हुआ. पिछले 22 वर्षों से वह उसी विद्यालय में बच्चों के भविष्य को संवारने में जुटे हैं.

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By मनीष नंदन सिंह

मनीष नंदन सिंह बीते 16 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. इनका जनहित से जुड़ी खबरों से गहरा जुड़ाव है और ये स्थानीय व क्षेत्रीय स्तर की खबरों पर मजबूत पकड़ रखते हैं. मनीष जन-सरोकार के मुद्दों की सटीक और जमीनी रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं.

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