Sasaram News : खेती में रासायनिक उर्वरकों के बढ़ते इस्तेमाल से मिट्टी की उर्वराशक्ति पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव को लेकर कृषि वैज्ञानिकों ने चिंता जताई है. वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अधिक उत्पादन की उम्मीद में उर्वरकों का अंधाधुंध प्रयोग खेतों को धीरे-धीरे बीमार बना रहा है. इसका असर फसल उत्पादन के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है.
खेती बचाओ अभियान की शुरुआत
इसी उद्देश्य से रोहतास जिले के बिक्रमगंज प्रखंड अंतर्गत मानी पंचायत में मंगलवार को खेत बचाओ अभियान’ की शुरुआत की गई. अभियान का शुभारंभ कृषि विज्ञान केंद्र के वरीय वैज्ञानिक डॉ. रामाकांत सिंह, कृषि वैज्ञानिक डॉ. रतन कुमार, प्रखंड कृषि पदाधिकारी प्रियांशु पराशर, वन क्षेत्र पदाधिकारी विनय कुमार तथा आत्मा के शांत कुमार शर्मा ने संयुक्त रूप से किया. कार्यक्रम की अध्यक्षता किसान क्लब के अध्यक्ष जनार्दन सिंह ने की.
कार्यक्रम के दौरान किसानों ने यूरिया को निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर बेचे जाने की शिकायत भी उठाई. इस पर प्रखंड कृषि पदाधिकारी ने लिखित शिकायत मिलने पर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया.
जैविक खाद अपनाने पर दिया जोर
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि अधिक उर्वरक डालने से अधिक उत्पादन होने की धारणा गलत है। रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता लगातार घट रही है, जिससे फसलों में कीट एवं रोगों का प्रकोप बढ़ रहा है.
उन्होंने किसानों को मिट्टी जांच के आधार पर संतुलित मात्रा में उर्वरकों का उपयोग करने, फसल अवशेषों को खेत में ही छोड़ने तथा गोबर एवं अन्य जैविक पदार्थों से प्राकृतिक खाद तैयार करने की सलाह दी. साथ ही मूंग और उड़द जैसी दलहनी फसलों की खेती को बढ़ावा देने तथा परिवार की जरूरत के लिए प्राकृतिक तरीके से अनाज उत्पादन करने का संकल्प भी दिलाया.
टिकाऊ खेती की पद्धतियों को अपनाएं
प्रखंड कृषि पदाधिकारी प्रियांशु पराशर ने कहा कि यदि खेतों की उर्वराशक्ति को बचाने के लिए अभी से प्रयास नहीं किए गए, तो भविष्य में कृषि भूमि के बंजर होने का खतरा उत्पन्न हो सकता है. उन्होंने किसानों से टिकाऊ खेती की पद्धतियों को अपनाने की अपील की.
