बारिश ने बढ़ायी किसानों की चिंता, गेहूं की फसल पर खतरा
SASARAM NEWS.प्रखंड क्षेत्र में बदलते मौसम का असर अब खेतों में साफ तौर पर दिखायी देने लगा है. परसथुआं, कपसियां, रामपुर, कोचस, ओझवलिया, चितांव, रेड़ियां, कंजर, रुपी, कुछिला सहित आसपास के कई गांवों में गेहूं की फसल पूरी तरह पककर कटाई के लिए तैयार खड़ी है. लेकिन, इसी बीच आयी तेज हवाओं और असमय बारिश ने किसानों की उम्मीदों पर संकट के बादल खड़े कर दिये हैं.
By Vikash Kumar | Updated at :
तेज हवाओं के कारण कई खेतों में गेहूं की फसल गिरने लगी
कोचस.
प्रखंड क्षेत्र में बदलते मौसम का असर अब खेतों में साफ तौर पर दिखायी देने लगा है. परसथुआं, कपसियां, रामपुर, कोचस, ओझवलिया, चितांव, रेड़ियां, कंजर, रुपी, कुछिला सहित आसपास के कई गांवों में गेहूं की फसल पूरी तरह पककर कटाई के लिए तैयार खड़ी है. लेकिन, इसी बीच आयी तेज हवाओं और असमय बारिश ने किसानों की उम्मीदों पर संकट के बादल खड़े कर दिये हैं. मौसम के इस अचानक बदले मिजाज ने किसानों की चिंता कई गुना बढ़ा दी है. किसान अरविंद ओझा, कमलाकांत पांडेय, संतोष तिवारी, संजय राय, कामेश्वर सिंह, हरिहर चौधरी, दिनेश शर्मा और कुमार रुद्र प्रताप सिंह ने बताया कि गेहूं की फसल में काफी मेहनत और पूंजी लगायी है. उन्होंने समय पर बुआई, सिंचाई, खाद और कीटनाशकों का उपयोग कर फसल को तैयार किया है. खेतों में इस समय सुनहरी बालियां लहलहा रही हैं और कटाई का कार्य अगले कुछ दिनों में शुरू होने ही वाला था कि अचानक तेज हवा और बारिश ने स्थिति बदल कर रख दी. तेज हवाओं के कारण कई खेतों में गेहूं की फसल गिरने लगी है. इससे न केवल गुणवत्ता प्रभावित होती है, बल्कि उत्पादन में भी भारी कमी आने का खतरा है. गिरी हुई फसल में दानों का भराव सही ढंग से नहीं हो पाता, जिससे उपज घटने की संभावना बढ़ जाती है.वहीं, बारिश के कारण गेहूं की बालियों में नमी बढ़ने लगी है.
लंबे समय तक यही स्थिति रहने से हो सकती है दानों में अंकुरण की समस्या
किसानों का कहना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो दानों में अंकुरण की समस्या उत्पन्न हो सकती है. इससे गेहूं का रंग फीका पड़ता है और गुणवत्ता खराब हो जाती है, जिसका सीधा असर बाजार मूल्य पर पड़ता है. परिणामस्वरूप किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.फिलहाल किसान आसमान की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं और मौसम के साफ होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं. यदि जल्द ही मौसम अनुकूल हो जाता है, तो वे तेजी से फसल की कटाई कर नुकसान को कम करने की कोशिश करेंगे.