छपरा. साल के पहले दिन गुरुवार को जिले के सभी सरकारी विद्यालय समय से खुले दिखे. शिक्षक स्कूल पहुंचे और हाजिरी बनाकर बच्चों और छुट्टी की प्रतीक्षा करते रहे. इस कड़ाके की ठंड में बच्चों के लिए स्कूल बंद था, लेकिन शिक्षकों को कोई राहत नहीं दी गयी. स्कूल में बायोमेट्रिक और ऑनलाइन हाजिरी के कारण किसी तरह की छूट संभव नहीं थी. अधिकारियों के अनुसार, शिक्षक अपने रोज़मर्रा के टिफिन लेकर स्कूल पहुंचे और उनका पहला दिन स्कूल में ही बीता. शिक्षक अपने बच्चों के साथ नववर्ष नहीं मना सके और यह दिन उनके लिए मायूसी भरा रहा. कुछ शिक्षकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अब उनकी जिंदगी कठिन हो गयी है और पर्व-त्योहार कब आता है और कब चला जाता है, इसका पता ही नहीं चलता. यह नियम पूर्व अपर मुख्य सचिव केके पाठक द्वारा लागू किया गया था, जिसका उद्देश्य राज्य की शैक्षणिक व्यवस्था को बेहतर बनाना था. इसी नियमावली के तहत पर्व-त्योहार के बावजूद शिक्षक समय से स्कूल पहुंचते हैं. वहीं जिले के सरकारी कार्यालय भी खुले रहे. हालांकि यहां सुविधा यह थी कि प्रतिबंधित अवकाश के तहत कई कर्मचारियों ने छुट्टी ली हुई थी, जिससे उन्हें थोड़ा राहत मिला. कार्यालय में उपस्थित कर्मचारी आम दिनों की तरह काम करते दिखे. जिलाधिकारी भी समय से कार्यालय पहुंचे और विकास योजनाओं को गति देने के लिए अधिकारियों के साथ लगातार विचार-विमर्श करते रहे.
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