मोंथा चक्रवात का असर, सारण में रिमझिम बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त

जिले में 29 और 30 अक्टूबर को चक्रवाती तूफान ‘मोंथा’ के प्रभाव दिखने की संभावना व्यक्त की गयी थी, जो अब सच होती दिख रही है.

छपरा. जिले में 29 और 30 अक्टूबर को चक्रवाती तूफान ‘मोंथा’ के प्रभाव दिखने की संभावना व्यक्त की गयी थी, जो अब सच होती दिख रही है. जिले में बुधवार को लगातार 12 घंटे से रिमझिम बारिश हो रही है. इसका सबसे बड़ा असर किसानों और आम जनजीवन पर पड़ा है. छपरा नगर निगम क्षेत्र में जगह-जगह जलजमाव से स्थिति नारकीय हो गयी है, वहीं बिजली व्यवस्था भी पूरी तरह चरमरा गयी है. रिमझिम बारिश को मौसम वैज्ञानिकों ने चक्रवाती तूफान का प्रारंभिक संकेत बताया है. बुधवार की देर रात तक बारिश होती रही और पुरवैया हवा का रुख बना रहा. शाम होते-होते बारिश तेज हो गयी, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गयी. सारण का अधिकतम तापमान 29°C और न्यूनतम तापमान 22°C रिकॉर्ड किया गया.

30 और 31 अक्टूबर को दिखेगा मोंथा का असली रूप

विशेषज्ञों के अनुसार, मोंथा के प्रभाव से हवा में नमी बढ़ने से वातावरण भारी और आर्द्र हो गया है. 31 अक्टूबर तक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है. मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि बिहार में मोंथा का असली असर 30 और 31 अक्टूबर को महसूस किया जाएगा. इस दौरान हल्की से भारी बारिश और बिजली गिरने की संभावना है.

पटना मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, चक्रवात मोंथा के प्रभाव से 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं. विभाग ने लोगों, विशेष रूप से किसानों, को खुले मैदानों, पेड़ों या बिजली के खंभों के पास जाने से बचने की सलाह दी है। आने वाले दिनों में दिन के तापमान में 2–4°C की गिरावट देखी जा सकती है. मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि नवंबर के पहले सप्ताह से सुबह और शाम में ठंड का एहसास बढ़ने लगेगा.

बारिश से धान की फसल को भारी नुकसान

लगातार बारिश और चक्रवाती हवाओं के कारण धान की फसल चौपट हो रही है. पककर तैयार फसल पानी में भीग जाने से किसानों को भारी नुकसान हो रहा है. हालांकिदेर से बोए धान, सरसों और मटर की फसल के लिए यह बारिश फायदेमंद मानी जा रही है. वहीं, आलू की खेती वाले खेतों में पानी भरने से नुकसान की आशंका बनी हुई है. इसके अलावा लगातार बारिश से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बाधित रही. कई जगहों पर ट्रांसफार्मर के कट-आउट उड़ गए या केबल खराब हो गये. ग्रामीणों ने बताया कि अधिकांश तार पुराने हैं, जिन्हें बार-बार जोड़ने के कारण शॉर्ट सर्किट की घटनाएं बढ़ रही हैं. बिजली विभाग की टीमें देर रात तक मरम्मत कार्य में जुटी रहीं. हालांकि अधिकांश मोहल्लों में रात तक आपूर्ति बहाल कर दी गयी. बारिश के चलते छपरा नगर निगम क्षेत्र की प्रमुख सड़कों पर जलजमाव की स्थिति बन गयी है. इससे राहगीरों और दुकानदारों को भारी परेशानी हो रही है. लोगों ने निगम की कमजोर कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि थोड़ी-सी बारिश में ही सड़कों पर तालाब जैसी स्थिति बन जाती है.

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Published by: Alok kumar

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